कर्नाटक विधानसभा चुनाव कई मामलों में रोचक होता जा रहा है। चुनाव में जहां दो मुख्य पार्टियां सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी अपनी-अपनी जीत और सत्ता हासिल करने का ताल ठोंक रही हैं, वहीं जनता दल सेक्युलर एक ऐसी पार्टी के रूप में उभरी है जो कांग्रेस और भाजपा के लिए गले का फांस बन गई है। एक ओर जहां मुखिया एचडी देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस चुनाव में तुरुप का इक्का बनती जा रही है। इसी जद्दो जहद के बीच मामला एक बार फिर तब पलट गया जब शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी ने जेडीएस की पूरी हवा को बदल लिया। पीएम ने कहा कि कांग्रेस और जनता दल ऐसा दिखा रही हैं कि दोनों पार्टियां इस चुनाव में एक दूसरे के आमने सामने हैं। लेकिन सच्चाई ये है कि दोनों पार्टियों में गुप्त समझौता है और दोनों ही पार्टियां एक दूसरे के लिए लड़ रही है।
जबकि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जेडीएस की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाए जाने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया था। पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवगौड़ा खुद भी प्रधानमंत्री मोदी की लगातार तारीफ किए जा रहे थे।
वहीं दूसरी तरफ कयास ये लगाया जा रहा था कि जेडीएस कांग्रेस पार्टी के साथ है और दोनों ही पार्टियों में गुप्त गठबंधन है। लेकिन सिद्धारमैया ने पिछले दिनों यह कह कर कि कांग्रेस राज्य में आसानी से चुनाव जीत रही है नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जेडीएस या अन्य किसी दल से मदद की जरूरत नहीं है। सिद्धारमैया ने कहा कि मोदी का देवगौड़ा की तारीफ करना एक राजनीतिक बयान है और यह साफ दिखाता है कि भाजपा और जेडीएस के बीच मूक सहमति है। भाजपा नेता जेडीएस की आलोचना नहीं करते और ना ही वे भाजपा की करते हैं।