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खनन माफिया रेड्डी बंधुओं के केस की सुनवाई में हो रही देरी की वजह CBI नहीं, पूर्व निदेशक ने किया दावा

Sat, 05 May 2018 04:58 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
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DR Karthikeyan
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कर्नाटक में खनन माफिया के नाम से मशहूर रेड्डी बंधुओं के केस की सुनवाई में हो रही देरी को देखते हुए सीबीआई के पूर्व निदेशक डीआर कार्तिकेयन ने सरकार और सरकारी मशीनरी पर सवालिया निशान लगाया है। डीआर कार्तिकेयन ने कहा कि पूरे मामले में देरी की वजह के लिए सीबीआई को दोष नहीं दिया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि इस पूरी देरी की वजह है उस राज्य की संबंधित सरकार और वह विभाग जिसकी नाक के नीचे रेड्डी बंधुओं ने यह घोटाला किया है। यही नहीं कुछ मामलों में अपराधी चालाक वकीलों को खूब सारे पैसे देकर भी पूरे मामले में देरी कराते हैं। वकील भी पूरे मामले की सुनवाई में देरी कर सकते हैं। 

बता दें कि कर्नाटक के रेड्डी भाइयों से जुड़े अवैध लौह अयस्क खनन मामलों में जांच पूरी करने के लिए सीबीआई की क्षमता और संसाधन पर सवाल उठता रहा है। जिसपर पूर्व निदेशक ने कहा है कि देरी की वजह सीबीआई नहीं बल्कि सरकार और विभाग होता है। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसी पर कई बार दबाव की संभावना तब रहती है जब अपराधी अत्यधिक प्रभावशाली हो और रेड्डी मामले में ऐसे संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
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उनके वोट देने पर भी रोक लगा दी है

बता दें कि शुक्रवार को जनार्दन रेड्डी की बेल की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सिरे से खारिज कर दिया है। बता दें कि रेड्डी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अपने भाई के चुनाव प्रचार में जाने के लिए इजाजत मांगी थी। उनके भाई बेल्लारी से चुनाव लड़ रहे हैं। सर्वोच्च अदालत ने रेड्डी के बेल्लारी में दाखिल होने पर लगाए गए प्रतिबंध को भी जारी रखा है। 

यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उनके वोट देने पर भी रोक लगा दी है। ज्ञात हो कि जनार्दन रेड्डी ने भाई जी. सोमशेखर रेड्डी चुनाव लड़ रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने बेल्लारी जाकर प्रचार करने और वोट डालने की अनुमति मांगी थी। जस्टिस ए.के सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने उनकी किसी भी मांग को नहीं माना और याचिका खारिज कर दी है।

जनार्दन रेड्डी पर आरोप है कि उन्होंने खनन के लिए की गई निशानदेही का उल्लंघन करके बेल्लारी संरक्षित वन क्षेत्र में खनन किया है। यह इलाका कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित है। तीन साल जेल में रहने के बाद दोनों को 2015 में जमानत पर रिहा किया गया, लेकिन इस शर्त के साथ कि वो अपने गृह क्षेत्र बेल्लारी में नहीं जाएंगे। इसके अतिरिक्त आंध्रप्रदेश के अनंतपुर व काडपा जिले में भी उनके प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। जनार्दन की अपील थी कि उनके छोटे भाई चुनाव मैदान में हैं, लिहाजा रोक को हटाया जाए।
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