भारत मां के वीरों ने 26 जुलाई 1999 को पाकिस्तान की सेना को खदेड़कर कारगिल की जंग फतह की थी। जांबाजों ने अपनी बहादुरी के बल पर इतिहास रच दिया था। दुर्गम पहाड़ियों पर चढ़कर दुश्मन को मार भगाया था। घर से विदा होते हुए ये जवान वादा करके गए थे, दुश्मन के चंगुल से मातृ भूमि को छुड़ाकर ही लौटेंगे। हुआ भी ऐसा ही। ये लौटकर आए, लेकिन तिरंगे में लिपटे हुए। ये दुनिया से तो चले गए, लेकिन करोड़ों हिंदुस्तानियों का सिर फख्र ऊंचा कर गए। आज (मंगलवार) पूरा देश इन जांबाजों के शौर्य को नमन करेगा।
मेरठ में तैनात सेना की बटालियनों ने भी युद्ध में बड़े स्तर पर हिस्सा लिया था। इन जवानों ने निडरता के साथ अपना लक्ष्य हासिल किया था। इनमें पाइन इन्फेंट्री डिविजन की 17वीं बटालियन गढ़वाल राइफल्स और चार्जिंग रैम डिविजन की 17वीं जाट रेजिमेंट के जवान शामिल रहे। ये बटालियन मेरठ में तैनात हैं।
17वीं बटालियन गढ़वाल राइफल्स उस समय पीस इलाके में तैनात थी। बटालियन को दुश्मन पर हमला करने का आदेश मिला। 31 मई 1999 को बटालियन पिथौरागढ़ से जम्मू कश्मीर के लिए रवाना हुई। दुर्गम पहाड़ियों से होते हुए बटालियन 10 जून 1999 को युद्ध क्षेत्र में पहुंची।