जिस करगिल की पहाड़ी पर वर्ष-1999 में पाकिस्तानी सेना ने कब्जा जमा लिया था और उसे वापस पाने के लिए सैकड़ों भारतीय जवानों को अपनी शहादत देनी पड़ी थी उसी जगह पर जाकर एम्स के चिकित्सकों ने वहां के जरूरतमंद लोगों के घुटने बदले और मोतियाबिंद की सर्जरी की।
एम्स के चिकित्सकों ने करीब 9000 फुट की उंचाई पर जाकर करगिल जिला अस्पताल में ही मरीजों की सर्जरी की। इस कार्य में भारत सरकार के अलावा राज्य सरकार का भी सहयोग मिला।
एम्स के चिकित्सकों का एक दल 12 जुलाई से करगिल जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज में जुट गया। करीब एक सप्ताह तक एम्स की टीम वहां रही। इस दौरान नौ मरीजों के 13 घुटनों को प्रत्यारोपित किया गया और 30 से ज्यादा मरीजों की मोतियाबिंद सर्जरी एम्स के चिकित्सकों ने की।
इसके अलावा यूरोलॉजी और सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने भी मरीजों की जांच-पड़ताल की। करगिल से दिल्ली आकर इलाज कराना बेहद मुश्किल और खर्चिला होता है इसलिए अशोक मिशन की पहल पर भारत सरकार की अनुमति मिलने के बाद एम्स से चिकित्सकों का दल करगिल भेजा गया था। इससे पहले एम्स की टीम तीन बार लेह-लद्दाख पहुंच कर भी सर्जरी कर चुकी है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के घुटना प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डॉ. सी.एस.यादव ने बताया कि सात दिनों में सैकड़ों मरीजों को देखा गया और नौ मरीजों के 13 घुटने बदले गए। जिनका घुटना प्रत्यारोपित किया गया उनमें पुरुष और महिला दोनों शामिल थीं।
सात दिनों के कैंप में सबसे ज्यादा मरीज हड्डी रोग से पीड़ित थे इसके बाद पेट और चेस्ट की समस्या से पीड़ित मरीज थे। डॉ.यादव ने बताया कि जब एम्स से टीम करगिल जा रही थी तब श्रीनगर में हालात ठीक नहीं थे लिहाजा रास्ता बदल कर लेह होते हुए करगिल जाना पड़ा।