राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विदेश नीति, रक्षा, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और रोजगार को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपना रिपोर्ट कार्ड खुद नहीं लिख सकते, इसे जनता लिखेगी। एसआरसीसी में प्रधानमंत्री के भाषण पर प्रतिक्रिया देते हुए सिब्बल ने कहा कि सरकार एक परीक्षा तक ठीक से नहीं करा सकती, तो देश चलाने की उसकी क्षमता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने नीट परीक्षा में बार-बार पेपर लीक होने का आरोप लगाया।
सिब्बल ने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी, आपका रिपोर्ट कार्ड हम लिखेंगे। आप अपना रिपोर्ट कार्ड खुद नहीं लिख सकते। यह आपकी एक अनोखी क्षमता है कि आप अपना रिपोर्ट कार्ड खुद लिखते हैं।'' उन्होंने प्रधानमंत्री की होम्योपैथी और दिमागी नक्सल वाली टिप्पणी की भी आलोचना की। पीएम मोदी ने एसआरसीसी में कहा था कि उन्होंने लाल किले से ऐसे लोगों के लिए होम्योपैथी की एक गोली दी थी, जिसे उन्होंने 'दिमागी नक्सल' बताया था।
छात्रों के प्रदर्शन में लाठीचार्ज को लेकर सिब्बल ने उठाए क्या सवाल?
कपिल सिब्बल ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों और वहां मौजूद युवा महिलाओं के साथ मारपीट और उन्हें घसीटना सही नहीं है। उन्होंने कहा, ''आप इस देश के प्रधानमंत्री हैं। क्या यह सही है कि आपके पुलिसकर्मी छात्रों को पीटें और वहां मौजूद युवा महिलाओं और लड़कियों को पीटकर घसीटा जाए?''
उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं का इलाज 'होम्योपैथी' से नहीं हो सकता और इसके लिए 'सर्जरी' की जरूरत है। महंगाई के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए सिब्बल ने कहा कि अगर सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि 7.8 प्रतिशत और नाममात्र वृद्धि 10.3 प्रतिशत है, तो महंगाई 2.5 प्रतिशत बैठती है। उन्होंने सवाल किया कि अगर महंगाई इतनी कम है तो चीनी, लहसुन, अदरक और दूध के दाम क्यों बढ़े हैं।
जीडीपी के आंकड़ों पर केंद्र सरकार को घेरा
उन्होंने कहा, ''आप दावा करते हैं कि महंगाई 2.5 प्रतिशत है, लेकिन इस पर कौन विश्वास करेगा? इन आंकड़ों पर कोई विश्वास नहीं करता।'' जम्मू-कश्मीर को लेकर सिब्बल ने प्रधानमंत्री के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि वहां स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति पूरी तरह सामान्य है तो जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल क्यों नहीं किया जाता।
आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे खत्म होने का दावा सही नहीं है। उन्होंने पहलगाम में 26 लोगों की मौत का जिक्र करते हुए सवाल किया कि अगर आतंकवाद खत्म हो गया है तो ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं। सिब्बल ने दलितों के साथ कथित दुर्व्यवहार और पीट-पीटकर हत्या की घटनाओं पर भी प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया।
मोहन भागवत के बयान पर भी साधा निशाना
उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जो किसी मुसलमान से देश छोड़ने के लिए कहता है, वह हिंदू नहीं है। सिब्बल ने कहा कि इसका संकेत स्पष्ट है और आरएसएस भी इस तरह की राजनीति के खिलाफ सलाह दे रहा है। सिब्बल ने प्रधानमंत्री के पुराने बयान का भी जिक्र किया, जिसमें मोदी ने कहा था कि जिस दिन वह हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करेंगे, उस दिन राजनीति छोड़ देंगे। सिब्बल ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद प्रधानमंत्री वर्षों से इसी तरह की राजनीति कर रहे हैं।