हालांकि उत्तराखंड में कांवड़ यात्रा को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। उत्तराखंड के नव नियुक्त मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्राथमिक तौर पर इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा को अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया था। इसके पीछे हरिद्वार कुंभ को अनुमति मिलने के कारण राज्य में फैली कोरोना महामारी से उपजी परिस्थिति को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है।
इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि वह उत्तराखंड के सीएम से बात करके इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश करेगी। धार्मिक मामला देख धामी ने भी शुक्रवार को इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से बातचीत कर कोई फैसला लेने की बात कह दी है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जिस प्रकार की चिंता जताई है, उसे देखते हुए कहा जा रहा है कि अगर इस वर्ष भी कांवड़ यात्रा को अनुमति दी जाती है तो यह कोरोना संकट को देखते हुए बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
इधर, दिल्ली और आसपास के इलाकों से लोग छुट्टियां बिताने उत्तराखंड के प्रमुख स्थलों पर जाने लगे हैं। मसूरी के कैंप्टी फॉल पर एक साथ सैकड़ों लोगों के जमा होने की तस्वीरें सामने आ गई हैं, जिसे देख लोगों में भारी भय व्याप्त हो गया। प्रधानमंत्री ने इसके बाद लोगों को चेताया है कि कोरोना अभी कहीं गया नहीं है और अभी इसके प्रति लापरवाह होने की आवश्यकता नहीं है, अन्यथा इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। प्रधानमंत्री की इतनी गंभीर चिंता के बाद भी कांवड़ यात्रा को अनुमति मिलने को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है।
दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल में कोरोना प्रबंधन की भूमिका निभा रहे डॉक्टर संदीप नायर ने अमर उजाला से कहा कि जब तक देश की 70 से 80 फीसदी आबादी को कोरोना की वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि समाज में हर्ड इम्यूनिटी आ चुकी है। इस स्थिति तक पहुंचने तक कोरोना की लहर के आने का खतरा उतना ही गंभीर है, जितना कि यह इसी वर्ष अप्रैल-मई महीने के दौरान था।
अक्टूबर-नवंबर तक भीड़ बढ़ाने का खतरा न उठाएं
अभी जिस रफ्तार से कोरोना वैक्सीनेशन चल रहा है और केंद्र सरकार ने अपनी जो योजनाएं बताई हैं, उसके अनुसार भी चलें तो 70 से 80 फीसदी आबादी को वैक्सीन लगाने में अक्टूबर-नवंबर तक का समय लग सकता है। तब तक भीड़ बढ़ाने का कोई खतरा नहीं उठाया जा सकता।
बचाव में ही समझदारी है
विशेषज्ञ के अनुसार, कोरोना की तीसरी लहर के बारे में अभी बिल्कुल ठीक-ठीक कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन जिस तरह पहाड़ों, बाजारों और मॉल्स में लोगों की भीड़ बढ़ रही है, कोरोना की तीसरी लहर के आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। दूसरी लहर की भयावहता को देखते हुए बचाव करने में ही समझदारी है।