'विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। जिसमें विश्व के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों का नाम सार्वजनिक किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से चौदह शहर भारत के हैं। कानपुर नगर को विश्व का सबसे प्रदूषित शहर माना गया। पिछले वर्ष देश में ढाई करोड़ से भी अधिक वाहनों का उत्पादन हुआ, जो उसके पिछले वर्ष की तुलना में 14.41% अधिक था।
वायु प्रदूषण की एक बड़ी वजह सड़कों पर दौड़ते डीजल व पेट्रोल इंजन वाले वाहन हैं। दूसरी वजह है, बढ़ती आबादी के लिए बिजली की तेजी से बढ़ती हुई मांग। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की पिछले वर्ष आई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 तक भारत में बिजली की मांग में 7.1% तक की बढ़ोतरी आ जाएगी और उसके अगले 5 वर्षों में ये मांग 6% तक बढ़ सकती है। अंत में समझने वाली बात ये है कि देश में लोगों की जनसंख्या और उसकी वजह से हो रहा वायु प्रदूषण तो लगातार बढ़ रहा है, पर प्रकृति द्वारा प्रदत्त एक मात्र वायु शोधन यंत्र, अर्थात वृक्षों की संख्या लगातार घट रही है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन दशकों में भारत ने तकरीबन चौदह हजार वर्ग किमी जंगल खोया है। जिसकी मुख्य वजह खदान, रक्षा प्रोजेक्ट व बांधों का निर्माण रही है। वर्तमान में हर वर्ष हम अपने देश के करीब 25 हजार हेक्टेयर यानी 250 वर्ग किमी जंगलों को गैर-वानिकी कार्यों के लिए देते जा रहे हैं। हमें समझना होगा कि पेड़ों को बचाकर और इसे लगाकर ही इस समस्या से बच सकते हैं।