कालाबुरागी के सुभाष पाटिल ने जेल में रहते हुए अपने सपने को साकार किया। बचपन में उनका सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना था। कुछ वर्ष बाद उन्हें हत्या के आरोप में बंगलूरू पुलिस ने गिरफ्तार किया। इसके बाद अदालत ने 14 वर्ष की जेल की सजा सुनाई।
सलाखों के पीछे रहने वाले 40 वर्षीय सुभाष खुद को अपने डॉक्टर बनने के बचपन के सपने का पीछा करने से नहीं रोका। सुभाष पाटिल को नवंबर 2002 में बंगलूरू पुलिस ने हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद अदालत ने उन्हें 14 साल के लिए दोषी ठहराते हुए सलाखों के पीछे भेज दिया।
बता दें कि सुभाष को जिस वक्त गिरफ्तार किया गया वह कालाबुरागी के एमआर मेडिकल कॉलेज में तीसरे वर्ष का छात्र था। इसके बाद वर्ष 2016 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
कलाबुरगी में अफजलपुर क्षेत्र स्थित भोसगा निवासी सुभाष ने गिरफ्तारी के बाद अपने सपने को नहीं छोड़ा। उन्होंने सेंट्रल जेल अस्पताल में डॉक्टरों की सहायता की। सुभाष ने बताया कि वर्ष 2008 में स्वास्थ्य विभाग ने तपेदिक से प्रभावित कैदियों के इलाज के लिए उन्हें सम्मानित किया था।
सुभाष जेल में रहते हुए वर्ष 2007 में पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा किया। इसके बाद 2010 में कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही एमए किया।
सुभाष का कहना है कि परिश्रम और जुर्म के पश्चाताप ने उन्हें इस मंजिल तक पहुंचा। 2019 में उनका एमबीबीएस पूरा हुआ और आज उन्होंने एक साल की इंटर्नशिप पूरी कर ली है। उन्होंंने इस मंजिल तक पहुंचने में पिता तुकाराम पाटिल के सहयोग की सराहना किया।
सुभाष का कहना है कि मैं राज्य सरकार और राज्यपाल का आभारी हूं जिन्होंने मेरे अच्छे आचरण के लिए रिहाई का आदेश दिया। उन्होंने अपने भविष्य को गरीबों की सेवा के लिए तत्पर रहने को कहा।