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भारत-चीन सीमा पर टेंशन, नाथुला होकर जाने वाली मानसरोवर यात्रा रद्द

Fri, 30 Jun 2017 03:18 PM IST
amarujala.com- Presented by: श्रवण शुक्ला
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नाथू-ला पास - फोटो : travellersoul
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भारत-चीन-भूटान ट्राई जंक्शन के पास चुंबी घाटी में सड़क निर्माण कर चीनी वर्चस्व स्थापित करने की कोशिशों के विरोध और सेनाओं की तैनाती होने से तनाव नाजुक स्तर तक पहुंच चुका है। एक तरफ डोंकलैम तनाव पर भारत और चीन दोनों ही देश बातचीत के रास्ते पर जाने की बात कर रहे हैं, तो चीनी सैनिकों के गतिरोध के चलते इस साल नाथूला दर्रे से होकर गुजरने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा रोक दी गई है। भारत सरकार ने तय किया है कि जबतक सिक्किम में घुसपैठ के मामले में चीन से विवाद नहीं सुलझ जाता, तबतक नाथूला दर्रे से कोई भी दर्शनार्थी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर नहीं जाएगा। भारत सरकार का कहना है कि हम प्रतिकूल परिस्थितियों में यात्रियों को भेजकर किसी भी तरह से चीन से समझौता नहीं चाहते। यही नहीं, मौजूदा समय पर सीमाई इलाके में भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने डटी हैं, जो किसी भी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं है। 
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ये है सिक्किम में भारत-चीन के बीच टकराव की सबसे बड़ी वजह

इस मामले में चीन ने भारत को चेताते हुए कहा था कि वो 1962 की जंग याद कर ले और अपनी सेना पीछे हटाए। तभी चीन इस मामले में भारत से कोई बातचीत करेगा। चीन के धमकी भरे बातचीत के रास्ते पर आने के बाद भारत के साथ ही भूटान ने भी चीन को करारा जवाब दिया। भूटान ने कहा कि वो अपनी संप्रभुता की कीमत पर कोई समझौता नहीं करेगा, तो भारत ने कहा कि वो भी बातचीत का इच्छुक है, पर पहले चीनी सेना अपने निर्माण कार्यों को बंद करे।

भारत और चीन के बीच बातचीत से पहले ही चीनी सेना ने कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों का पहला जत्था नाथुला दर्रे के पास रोक दिया था, तो अब भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए इस साल कैलाश मानसरोवर की यात्रा को ही रद्द कर दिया है। भारत सरकार चाहती है कि पहले पूरा मामला सुलझ जाए, उसके बाद ही कैलाश मानसरोवर की यात्रा शुरू की जाए। 
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#KailashMansarovar yatra through #NathuLa in #Sikkim cancelled. — Press Trust of India (@PTI_News) 30 June 2017 इस मसले पर चीन ने भारत को धमकाने के अंदाज में सिक्किम सीमा तनाव पर कहा है कि भारत पहले सीमा से अपनी सीमा हटाए, तभी उस बाबत कोई भी बातचीत होगी। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारतीय सेना चीनी इलाके में घुसी हैं, पहले उन्हें पीछे हटना होगा।  Meaningful dialogue needed for withdrawal of Indian troops from #Donklam area in Sikkim sector, says Chinese Foreign Ministry. — Press Trust of India (@PTI_News) 30 June 2017 वहीं, भारत सरकार ने कहा है कि इस मामले में चीन-भूटान-भारत को आपस में बातचीत करके सुलह करनी होगी।  #India asks all parties concerned to display utmost restraint and respect bilateral understandings. — Press Trust of India (@PTI_News) 30 June 2017 साथ ही भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि चीनी सड़क निर्माण परियोजना से भारत बेहद चिंतित है।  #India is deeply concerned at recent #Chinese actions: #MEA on road construction by China in #Doklam area. — Press Trust of India (@PTI_News) 30 June 2017 भारत सरकार सभी विवादों के शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए तैयार है। खासकर सीमाई इलाकों पर।  #India committed to working with #China to find peaceful resolution of all issues in border areas through dialogue: #MEA. — Press Trust of India (@PTI_News) 30 June 2017 इसके साथ ही भारत सरकार ने ये भी साफ कर दिया है कि चीनी सड़क परियोजना से भारत की सुरक्षा पर असर पड़ेगा। इसके बारे में चीन को भी सूचित कर दिया गया है। Conveyed to China that road construction would represent significant change of status quo with security implications for India: MEA. — Press Trust of India (@PTI_News) 30 June 2017 इससे पहले, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने बयान जारी करते हुए कहा कि चुंबा घाटी को लेकर भारत सरकार से अभी कोई बातचीत नहीं चल रही है। भारत से बातचीत करने के लिए चीन की एकमात्र शर्त है कि भारतीय सेना अपनी जगह से पीछे जाए, तभी कोई बातचीत होगी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने ये भी कहा कि भारत को साल 1962 को भी नहीं भूलना चाहिए। चीनी विदेश मंत्रालय ही नहीं, चीनी अखबार भी भारत के बारे में धमकी भरे लेख लिख रहे हैं। चीनी न्यूज पोर्टल ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारत पर 1962 के युद्ध में मिली हार का असर है। लेख में भारतीय मीडिया पर भी हमला करते हुए लिखा है कि वो एक ऐसा माहौल पैदा कर रही है जिससे ये साबित हो रहा है कि चीनी सैनिक उसके क्षेत्र में जबरन घुस रहे हैं। इतना ही नहीं, चीनी मीडिया सिक्किम बॉर्डर के मुद्दे को भी 1962 की जंग के दौरान अमेरिकी समर्थन से जोड़ते हुए देख रहा है। 

चीन का आरोप, भूटान-चीन मामले में टांग अड़ा रहा है भारत

nathula
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि सिक्किम एक आजाद देश था लेकिन भारत के साथ वह 1975 में जुड़ा। सिक्किम बॉर्डर को लेकर चीन-सिक्किम के बीच पहले ही बात बन चुकी थी और 2006 में नाथू ला दर्रा को लेकर भी फैसला किया जा चुका था। लेकिन भारत इसको लेकर आपत्ति जता रहा है।  बुधवार को चीनी सरकार ने कहा कि दोंगलांग क्षेत्र भारत और भूटान के हिस्से में नहीं आता है। इसके साथ ही लेख में भारत को इस मामले में हस्तक्षेप करने को लेकर थर्ड पार्टी बताया है। भूटान ने औपचारिक तौर पर उसके क्षेत्र में सड़क बनाने पर विरोध किया है। चीनी मीडिया भूटान के कारकों को लेकर बोल रहा है ना कि भारत के सीमा पार करने और सड़क बनाने पर रोक को लेकर। 

चीन की ओर से बढ़ती नापाक कोशिशों का भूटान को भी एहसास होने लगा है, इसलिए उसने भी डिमार्च जारी कर दी है। भारत और चीन के बीच तनाव के कई कारण है, जिसकी शुरुआत चीन का क्लास-40 रोड बना। चीन बॉर्डर पर रोड का निर्माण कर रहा है, ताकि उसके 40 टन तक के ट्रकों को आने-जाने में मदद मिल सके।
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Indian Army - फोटो : File Photo

भारत और चीन के बीच सड़क निर्माण को लेकर सीमा पर उठा तनाव थम नहीं रहा है। भारत की ओर से सिक्किम बॉर्डर पर 3000 सैनिक तैनात कर दिए गए हैं और भारत ने ये भी साफ कर दिया है कि इस तरह का रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

बॉर्डर पर तनाव के बाद दोनों देशों ने सिक्किम-भूटान-तिब्बत ट्राई जंक्शन पर करीब 3000 हजार सैनिक तैनात कर दिए हैं और ऐसा कई सालों बाद देखा जा रहा है। बॉर्डर पर चीन के तनातनी पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वो चीन की ओर से किए जा रहे बदलावों को गंभीरता से ले रहा है।

गौरतलब है कि भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना द्वारा भारतीय सीमा के अंदर किए जा रहे निर्माण कार्यों को रोक दिया था। जिसके बाद चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना के दो नए बंकर तोड़ दिए थे। इस समय नाथूला दर्रे के पास भारत और चीन की सेनाएं आमने सामने खड़ी हैं। यही नहीं, चीन ने अपनी तरफ से दबाव बढ़ाने के लिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा को भी रोक दिया है। ऐसे में माना जा रहा है कि लगातार मजबूत होता भारत चीन की आंखों में चुभ रहा है और वो अपने इस पड़ोसी को बड़े खतरे के तौर पर देखता है।
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