तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में कर्नाटक के धर्मस्थल मामले के पीछे एक बड़ी साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 'एक नकाबपोश व्यक्ति ने कर्नाटक की पूरी सरकारी मशीनरी को घुमाकर रख दिया है और उसका एकमात्र उद्देश्य सनातन धर्म के स्तंभों में से एक धर्मस्थल मंदिर को बदनाम करना है। इस मामले के पीछे गहरी साजिश है।'
'कर्नाटक सरकार ने आधारहीन दावों को सत्यता प्रदान की'
अन्नामलाई ने कहा कि 'कर्नाटक सरकार ने एक नकाबपोश व्यक्ति के आधारहीन दावों को सत्यता दे दी है, जबकि उसके दावों का कोई सबूत भी नहीं है। जल्दबाजी में एसआईटी बनाकर 13 जगहों पर खुदाई भी शुरू कर दी गई। हालांकि खुदाई वाली जगह से सिर्फ एक कंकाल मिला है और वो भी पुरुष का है। एक दूसरी जगह पर भी एक कंकाल मिला, लेकिन वह भी पुरुष का था और जांच में पता चला है कि जिसका कंकाल मिला है, उसने आत्महत्या की थी। यह नकाबपोश के दावों से मेल नहीं खाता।'
अन्नामलाई की मांग- मास्टरमाइंड का पता लगाया जाए
भाजपा नेता ने कहा कि 'सुजाता भट्ट नाम की महिला ने साल 2003 से अपनी बेटी के गुम होने का दावा किया, लेकिन बाद में उसने स्वीकार किया कि उसकी कोई बेटी ही नहीं है और फर्जी शिकायत दर्ज कराने के लिए कुछ लोगों ने उस पर दबाव बनाया था।' गौरतलब है कि कर्नाटक पुलिस ने शिकायतकर्ता नकाबपोश को गिरफ्तार कर लिया है। इस पर अन्नामलाई ने कहा कि 'इस गिरफ्तारी से ये मामला खत्म नहीं हुआ है बल्कि इस बात का पता लगाया जाना चाहिए कि उसके पीछे कौन है? कौन इसका मास्टरमाइंड है? धर्मस्थल को बदनाम करने से किसको फायदा होगा?' अन्नामलाई ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार इन सभी सवालों को दबाना चाहती है। उन्होंने मांग की कि असल मास्टरमाइंड का पता लगाया जाए और उसे जवाबदेह ठहराया जाए।
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शिकायतकर्ता नकाबपोश गिरफ्तार
पिछले दो दशकों में धर्मस्थल में कई हत्याओं, दुष्कर्मों और शवों को दफनाने का आरोप लगाने वाले शिकायतकर्ता को शनिवार को मामले की जांच कर रही एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिया। शिकायतकर्ता अब तक जांच पैनल के सामने नकाब पहनकर पेश हुआ था। हालांकि, अब उसकी पहचान सीएन चिन्नैया के रूप में हुई है। पूर्व सफाई कर्मचारी चिन्नैया ने दावा किया कि उन्होंने 1995 से 2014 के बीच धर्मस्थल में काम किया था, जिस दौरान उन्हें कथित तौर पर महिलाओं और नाबालिगों सहित कई शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पीड़ितों में यौन उत्पीड़न के लक्षण दिखाई दिए थे और उन्होंने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था। जांच के तहत एसआईटी शिकायतकर्ता की ओर से चिह्नित कई जगहों पर खोदाई कर रही है। दो जगहों से कंकाल बरामद हुए हैं।
यूट्यूबर को जारी हुआ समन
धर्मस्थल मामले की जांच कर रही एसआईटी ने यूट्यूबर एम डी समीर को एक नोटिस जारी कर 24 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया है। पुलिस ने बताया कि बल्लारी स्थित उनके आवास पर यह नोटिस तब चिपकाया गया जब मंगलूरू की एक अदालत ने 21 अगस्त को समीर को अग्रिम जमानत दे दी। धर्मस्थल पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 192 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना), 240 (गलत जानकारी देना) और 353(1)(बी) (सार्वजनिक रूप से उपद्रव फैलाने वाले बयान) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, ये आरोप समीर ने एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उसने मामले से कुछ दावे किए थे। अधिकारियों का आरोप है कि उनकी हालिया सामग्री भड़काऊ और गलत सूचना फैलाने वाली थी, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की संभावना थी। अग्रिम जमानत देते हुए, अदालत ने समीर को जांच में सहयोग करने और भड़काऊ बयान देने से बचने का निर्देश दिया।