230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में से दो सीटें खाली हैं, जिसके बाद कुल संख्या 228 है। अब तक 22 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा भेजा है। अगर इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार हो जाता है तो कुल संख्या 206 हो जाती है, जिसके बाद बहुमत के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी।
22 विधायकों के इस्तीफे और चार के लापता होने के बाद कांग्रेस की सीटें 114 से घटकर 88 रह जाती हैं। वहीं, भाजपा की 107 सीटें हैं। 2018 में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस ने चार निर्दलीय, दो बसपा और एक सपा विधायक के समर्थन से कुल 121 विधायकों के साथ सरकार बनाई थी।
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह का शुक्रिया कि उन्होंने हमें अपने परिवार में स्थान दिया। मेरे जीवन में दो तारीख काफी अहम रही हैं, इनमें पहला 30 सितंबर 2001 जिस दिन मैंने अपने पिता को खोया, वह जिंदगी बदलने वाला दिन है।
दूसरी तारीख 10 मार्च 2020 जो उनकी 75वीं वर्षगांठ थी जहां मैंने जीवन में एक बड़ा निर्णय लिया है। आज मन व्यथित है और दुखी भी है। जो कांग्रेस पहले थी वह आज नहीं रही, उसके तीन मुख्य बिंदु हैं। पहला कि वास्तविकता से इनकार करना, दूसरा नई विचारधारा और तीसरा नए नेतृत्व को मान्यता नहीं मिलना।
राजमाता सिंधिया ने भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना और विस्तार करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। आज उनके पौत्र हमारी पार्टी में आए हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया परिवार के सदस्य हैं, ऐसे में हम उनका स्वागत करते हैं।
- जेपी नड्डा, भाजपा अध्यक्ष
लोग डूबते हुए जहाज को छोड़ जाते हैं: खुर्शीद
कांग्रेस पार्टी में सम्मान मिलने के बाद सिंधिया को थोड़ा धैर्य रखना चाहिए था। उनके पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों के साथ करीबी रिश्ते हैं। यह पहली बार नहीं है कि जब पार्टी का खराब दौर चल रहा है। लोग डूबते हुए जहाज को छोड़ जाते हैं, दोस्त बुरे वक्त में साथ छोड़ देते हैं। लोग जाते हैं और जब वक्त बदलता है तो फिर लौट आते हैं। उन्हें पार्टी की नाकामी के बारे में हमें बताना चाहिए था। मुझे नहीं लगता है कि उन्हें हमारी पार्टी जितना ही भाजपा में सम्मान मिल पाएगा।
- सलमान खुर्शीद, कांग्रेस
वह इकलौते ऐसे जो मेरे घर बेधड़क आते थे : राहुल
मुलाकात का वक्त न देने की खबर गलत है। ज्योतिरादित्य ही इकलौते ऐसे थे जो बेधड़क कभी भी मेरे घर आ सकते थे। वे मेरे साथ कॉलेज में भी रहे हैं।
- राहुल गांधी, कांग्रेस
सिंधिया का कांग्रेस से अलग होना दुर्भाग्यपूर्ण : पायलट
ज्योतिरादित्य सिंधिया के रास्ते कांग्रेस से अलग होते देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। काश, चीजों को पार्टी के भीतर सहयोगपूर्वक हल किया जा सकता था।
-सचिन पायलट, कांग्रेस
हमारा लक्ष्य जनसेवा होना चाहिए : सिंधिया
कई बार ऐसे मोड़ आते हैं, जो जीवन को बदलकर रख देते हैं। दो तारीखें मेरे जीवन में अहम हैं। पहली 30 सितंबर 2001। इस दिन मैंने अपने पिता माधवराव सिंधिया को खोया था। यह जीवन बदलने वाला दिन था। दूसरी तारीख 10 मार्च 2020 इस दिन नए मोड़ का सामना करके मैंने एक फैसला लिया। हमेशा माना कि हमारा लक्ष्य जनसेवा होना चाहिए और राजनीति उस लक्ष्य की पूर्ति करने का एक माध्यम होना चाहिए।
- ज्योतिरादित्य सिंधिया