कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्वजय सिंह की छवि पर फिर बड़ी चोट पहुंची। दिसंबर 2018 में मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार बनने के समय भी दिग्विजय सिंह की छवि सिंधिया के मामले में खलनायक की बनी थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी के मुख्यालय में नेताओं का मानना है कि दिग्विजय सिंह के षडयंत्र और कमलनाथ के ऊपर उनके नियंत्रण के आगे ज्योतिरादित्य सिंधिया बेबस हो गए।
कांग्रेस पार्टी के मध्यप्रदेश के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुझे यह मान लेने में कोई संकोच नहीं है। यहां सिंधिया सही हैं कि उनके इस्तीफे की जमीन कांग्रेस के ही नेताओं ने तैयार की। लेकिन इसके साथ ही यह भी तय है कि सिंधिया का भी इसमें दोष है। वह अपने अहंकार में वास्तविकता को नजरअंदाज कर रहे थे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जब प्रेसवार्ता में सिंधिया के पार्टी ज्वाइन करने की घोषणा कर रहे थे तो मध्यप्रदेश से ही आने वाले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्र बुद्धे का मुदित मन काफी कुछ इशारा कर रहा था। प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा के चेहरे की खुशी और भाजपा प्रवक्ता जफर इस्लाम के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी।
भाजपा के मुख्यालय में साफ लग रहा था कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी का बहुत बड़ा विकेट गिरा दिया। पार्टी महासचिव अनिल जैन भी सिंधिया के ज्वाइन करने की अहमियत ढंग से समझ रहे हैं। भाजपा के नेताओं का मानना है कि मध्यप्रदेश में पार्टी की सरकार बनना तय है। इसके अलावा ग्वालियर-चंबल संभाग की सीटों पर अब हर चुनाव में भाजपा के प्रत्याशियों के जीत की गारंटी हो गई है।
पार्टी के एक महासचिव का कहना है कि मामला केवल मध्यप्रदेश का ही नहीं है, इसका असर कांग्रेस की देशव्यापी राजनीति पर पड़ेगा। सूत्रों का अनुमान है कि इससे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के राजनीतिक अभियानों को भी झटका लगेगा।
सिंधिया के राज्यसभा में आने की संभावना है। बताते हैं कि सिंधिया संसद में भी कांग्रेस पार्टी की परेशानी बढ़ाएंगे। भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा कि अभी वह पार्टी में आए हैं। अब पार्टी उनका बड़े पैमाने पर उपयोग करेगी।