बेटी और गांव की चौकीदारी! सुनने में कुछ अटपटा सा लगता है। लेकिन नवरात्र में नारी सशक्तीकरण की अच्छी खबर आई है। कोतवाली के गांव अब्दुल्लापुर लैदा निवासी ज्योति को गांव वालों ने ही चौकीदार बनवाया है।
ज्योति गांव ही नहीं, पूरे इलाके की पहली महिला चौकीदार है। अब वह गांव की चौकीदारी के साथ पुलिस के काम में भी हाथ बंटाने लगी है। उसकी सराहना पूरे गांव के लोग करते हैं। उसका कहना है कि वह गांव के विकास में अपना योगदान देना चाहती है।
कोतवाली ठाकुरद्वारा के गांव अब्दुल्लापुर लैदा निवासी ज्योति गांव के किशन सिंह की पुत्री है। ज्योति ने बताया कि उसके पिता पहले गांव के चौकीदार थे। लेकिन उनकी बीमारी से मौत हो गई। उसका भाई रोहित विदेश में काम करने गया हुआ है। इसलिए उसने अपने पिता के स्थान पर चौकीदार बनने का निर्णय लिया। उसने चौकीदार पद के लिए आवेदन किया। इस पर पुलिस अधिकारियों की संस्तुति पर डीएम ने उसे गांव का चौकीदार नियुक्त कर दिया है।
ज्योति ने बताया कि वह गांव में चौकीदार का काम देखने के साथ कोतवाली में आकर भी पुलिस के कार्य में मदद करती है। महिला पुलिस कर्मी के न होने पर उसे कोतवाली बुलाकर महिला पुलिस कर्मी के स्थान पर कार्य कराया जाता है। उसने बताया कि उसने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा प्राप्त की है। वह चौकीदार का कार्य करने के साथ स्टेनो की परीक्षा की तैयारी भी कर रही है। उसकी इच्छा पुलिस विभाग में ही नौकरी करने की है। उसकी दो और बहन हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। वह घर पर काम काज के साथ अपनी मां चंद्रो देवी की भी देखभाल करती है।