आज से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में सरकारी आवास परिसर से जली हुई नकदी बरामद होने के बाद विवादों में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया चलाने की तैयारी हो रही है। सरकार के मुताबिक संसद में प्रस्ताव पेश करने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल चुका है। प्रस्ताव लाने के नोटिस पर सौ सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। जानिए आगे क्या होगा?
आवासीय परिसर से जली हुई नकदी भारी मात्रा में बरामद होने के बाद से विवादों में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने के लिए संसद में प्रस्ताव पेश किया जाना है। इससे संबंधित नोटिस पर 100 सांसदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए आवश्यक समर्थन हासिल हो चुका है।
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जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने का प्रस्ताव, नोटिस पर 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को बताया कि जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के प्रस्ताव संबंधी नोटिस पर 100 से ज्यादा सांसद ने पहले ही हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने के लिए आवश्यक समर्थन हासिल हो गया है।
संसद में महाभियोग से जुड़ा प्रस्ताव कब पेश होगा? कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) तय करेगी समय
रिजिजू ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, अभी हस्ताक्षर प्रक्रिया जारी है। 100 से अधिक सांसद हस्ताक्षर कर चुके हैं। यह कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) को तय करना है कि प्रस्ताव कब पेश किया जाएगा। किसी न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव पर लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए। यह प्रस्ताव लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है।
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सरकार की प्राथमिकता क्या? रिजिजू ने टिप्पणी करने से इनकार किया
जब रिजिजू से पूछा गया कि क्या सत्र के पहले सप्ताह में प्रस्ताव लाया जा सकता है तो उनका कहना था, मैं प्राथमिकता के आधार पर किसी भी कार्य पर टिप्पणी नहीं कर सकता क्योंकि जब तक अध्यक्ष की अनुमति से प्रस्ताव बीएसी से पारित नहीं हो जाता, कुछ कहना मुश्किल है।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार संवेदनशील-गंभीर मामला: जस्टिस वर्मा मुद्दे पर सभी राजनीतिक दल सहमत
रिजिजू पहले भी कह चुके हैं कि जस्टिस वर्मा को हटाने के प्रस्ताव पर सभी राजनीतिक दल सहमत हैं। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार एक अत्यंत संवेदनशील और गंभीर मामला है। गौरतलब है कि मार्च में दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन जस्टिस वर्मा के आवास में आग लगने की घटना के बाद नोटों की गड्डियां बरामद हुई थीं।