Justice UU Lalit - Kalyan Singh
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सुप्रीम कोर्ट में रामजन्भूमि केस के दौरान उस वक्त नाटकीय मोड़ आ गया जब मुस्लिम पक्षकार ने संवैधानिक बेंच के सदस्य जस्टिस यूयू ललित को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। मुस्लिम पक्षकार ने जस्टिस ललित और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह कनेक्शन को लेकर सवाल उठाए जिसके बाद जस्टिस ललित ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया है।
दरअसल 1994 में राम मंदिर से जुड़े कोर्ट के अवमानाना के मामले में यूयू ललित ने कल्याण सिंह के वकील के रूप में उनका पक्ष रखा था। उस मामले में कोर्ट ने कल्याण सिंह को एक दिन की जेल और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी थी। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने यही बात कोर्ट के संज्ञान में लाई। चीफ जस्टिस ने धवन से कहा कि आप खेद क्यों जता रहे हैं, आपने केवल तथ्य सामने रखे थे। वहीं केंद्र सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि हमें यूयू ललित से कोई समस्या नहीं है। मगर फिर भी जस्टिस ललित ने खुद को इस केस से अलग कर लिया है।
30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जस्टिस सुधीर अग्रवाल, जस्टिस एस यू खान और जस्टिस डी वी शर्मा की बेंच ने अपने फैसले में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया था। जिसमें राम लला विराजमान वाला हिस्सा हिंदू महासभा को, दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़े को और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया था।
बता दें कि चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली इस पांच सदस्यीय पीठ में पहले जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमण, जस्टिस उदय यू ललित और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ शामिल थे। लेकिन अब जस्टिस ललित के अलग होने के बाद नई बेंच का गठन किया जाएगा। इस मामले की सुनवाई फिलहाल 29 जनवरी के लिए टाल दी गई है।