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Justice Surya Kant: 'बेहतरीन अदालती ढांचे से बढ़ेगा जनता का विश्वास', चेन्नई में बोले जस्टिस सूर्यकांत शर्मा

Sun, 26 Oct 2025 09:48 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने चेन्नई में मद्रास हाईकोर्ट के नवनिर्मित ऐनेक्स भवन का उद्घाटन करते हुए कहा कि न्यायिक अवसंरचना पर खर्च किया गया हर रुपया जनता के विश्वास में निवेश है। उन्होंने कहा कि मजबूत न्यायिक ढांचा नागरिकों के अधिकारों की गारंटी है।
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जस्टिस सूर्यकांत, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने जा रहे न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि अदालतों के ढांचे, डिजिटलीकरण, प्रशिक्षण और बेहतर कनेक्टिविटी पर खर्च किया गया हर रुपया कई गुना वापसी लाता है, भले ही यह लाभ आर्थिक न हो, लेकिन यह जनता के विश्वास के रूप में लौटता है। उन्होंने कहा कि मजबूत न्यायिक अवसंरचना जनता के भरोसे और न्याय प्रणाली की पारदर्शिता की नींव है।
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न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रविवार को चेन्नई में मद्रास हाईकोर्ट के नवनिर्मित ऐनेक्स भवन का उद्घाटन किया। यह ऐतिहासिक धरोहर भवन 126 साल पहले बना था और पहले मद्रास लॉ कॉलेज के रूप में इस्तेमाल होता था। अब इसे आधुनिक रूप में पुनर्निर्मित कर हाईकोर्ट परिसर का हिस्सा बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के निवेश को जनता के भरोसे में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि न्याय व्यवस्था की गुणवत्ता सीधे लोगों के जीवन, स्वतंत्रता और अधिकारों को प्रभावित करती है।

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क्या बोले न्यायमूर्ति सूर्यकांत 
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस अवसर पर कहा कि यह भवन केवल एक स्थापत्य धरोहर नहीं है, बल्कि न्यायिक परंपरा और आधुनिकता का संगम है। उन्होंने कहा कि अतीत और भविष्य एक ही छत के नीचे आ गए हैं। जिन लाल पत्थरों की दीवारों में कभी विधि शिक्षा की आवाज गूंजती थी, अब वहीं न्यायिक तर्क प्रतिध्वनित होंगे। यह हमें याद दिलाता है कि न्याय के आदर्श सत्य, निष्पक्षता और समानता समय के साथ बदलते संस्थागत रूपों के बावजूद शाश्वत हैं।

न्यायिक गरिमा से जुड़ी सीख
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में उन्होंने कैसे सीमित संसाधनों के बीच काम किया। उन्होंने कहा कि जहां फाइलें टेबल से ऊंची लगाई जाती थीं, पंखे डगमगाते थे और रजिस्टर के पन्ने पीले हो चुके थे, वहीं से यह समझ आया कि न्याय केवल मानव की ईमानदारी पर नहीं, बल्कि संस्थागत समर्थन पर भी टिका होता है। उन्होंने कहा कि जब न्यायपालिका गरिमा के साथ कार्य करती है, तब नागरिकों के मौलिक अधिकार सुरक्षित रहते हैं और न्याय किसी क्षेत्रीय संयोग नहीं, बल्कि पूरे देश में समान रूप से सुनिश्चित होता है।

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केंद्रीय मंत्री ने बताया सरकार का विजन
कार्यक्रम में केंद्रीय कानून और न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि केंद्र सरकार न्यायिक प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुलभ और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण, न्यायालयों के बुनियादी ढांचे का विस्तार और प्रशिक्षण से न्यायपालिका अधिक सक्षम होगी। 

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आर. महादेवन, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव, तमिलनाडु के कानून मंत्री एस. रेघुपति, न्यायमूर्ति आर. सुरेश कुमार, महाधिवक्ता पी.एस. रमन और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ए.आर.एल. सुंदरासन मौजूद थे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश ने इस कार्यक्रम में बार्सिलोना से वर्चुअल रूप में भाग लिया।

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