सुप्रीम कोर्ट के सभी जज समान होते हैं, चाहे
चीफ जस्टिस हो या बाकी दूसरे जज। कानूनी जानकारों की माने तो चीफ जस्टिस को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि किसी मामले को किस पीठ केसमक्ष भेजा जाना चाहिए। लिहाजा इसे लेकर वरिष्ठ जजों को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हालांकि कुछ जानकारों का कहना है कि मामले के आवंटन को लेकर एक सिस्टम होना चाहिए।
दिल्ली हाईकोर्ट केपूर्व न्यायमूर्ति आरएस सोढ़ी के मुताबिक, चीफ जस्टिस को पूरा अधिकार है कि वह मामले को किस जज केभेजे। उन्होंने चार वरिष्ठतम जजों की आपत्ति को बचकाना बताया है। साथ ही उन्होंने कहा कि जनता के बीच उनकेआने से गलत संदेश गया है। आम लोगों में यह संदेश गया है कि जब वे जज होकर भी अपनी तकलीफ नहीं सुलझा सकते तो वे आम जनता को कैसे इंसाफ दिला पाएंगे।
पढ़ें- निवेश के लिए संस्थागत मध्यस्थता प्रणाली की जरूरत: चीफ जस्टिस
जस्टिस सोढ़ी का कहना है कि चारों जजों की तकलीफ बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि उनका यह कहना कि लोकतंत्र खतरे में है, यह बात बेमानी है। हमारा देश बहुत मजबूत है। इन बातों से लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें लग रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक नहीं हो रहा है तो उन्हें पूरी से खुलकर सामने आना चाहिए।