पहले लोकपाल जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष के बारे में खास बातें-
जस्टिस पीसी घोष को मानवाधिकार कानूनों पर उनकी बेहतरीन समझ और विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। जस्टिस घोष उच्चतम न्यायालय के जज रह चुके हैं। वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रहे हैं। वह अपने दिए गए फैसलों में मानवाधिकारों की रक्षा की बात बार-बार करते थे। वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं।
शशिकला को सजा सुना कर चर्चा में आए थे जस्टिस घोष
जस्टिस घोष ने अपने सुप्रीम कोर्ट कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले दिए। वह तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता की करीबी शशिकला को आय से अधिक संपत्ति मामले में सजा सुना कर देशभर में चर्चा में आए थे। उन्होंने शशिकला समेत बाकी आरोपियों को दोषी करार देने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। हालांकि फैसला सुनाए जाने से पहले तक जयललिता की मौत हो चुकी थी।
पांच पीढ़ी से कानूनी पेशे में है परिवार
जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष कोलकाता के रहने वाले हैं। उनकी पांच पीढ़ी कानूनी पेशे से जुड़े हुई हैं। घोष यहां के जोरासंको के प्रतिष्ठित दीवान बरनसाई घोष परिवार से आते हैं। घोष के पिता जस्टिस शंभू चंद्र घोष कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस थे। साल 1867 में सदर दीवानी अदालत के पहले भारतीय चीफ जज बनने वाले हर चंद्र घोष भी इसी परिवार से थे।