फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: न्यायिक प्रणाली को आसान बनाने के लिए किया जा रहा काम, जानें और क्या बोले जस्टिस चंद्रचूड़

Sat, 24 Sep 2022 05:45 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से एक जजमेंट सर्च पोर्टल भी बनाया है। ये विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए भी मददगार साबित होगा। इसके जरिए विकलांग और अन्य लोगों के लिए भी उच्च न्यायालय के 75 लाख से अधिक फैसले स्वतंत्र और आसानी से उपलब्ध होंगे।
विज्ञापन
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उच्चतम न्यायालय की ई-समिति विकलांग व्यक्तियों के लिए न्यायिक प्रणाली में डिजिटल बुनियादी ढांचे को अधिक सुलभ और आसान बनाने के लिए काम कर रही है। उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। तीसरे 'प्रोफेसर शामनाद बशीर मेमोरियल लेक्चर, 2022' में विकलांग व्यक्तियों के लिए न्यायिक प्रणाली से जुड़े विषय पर बोलते हुए उन्होंने ये बातें कहीं। 

विज्ञापन


अपने संबोधन में उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि जरूरी कानूनों के बावजूद कई सरकारी और निजी भवन, परिवहन, पार्क और कई अन्य स्थानों तक विकलांग व्यक्तियों की पहुंच नहीं हो पा रही है। वे उनके लिए दुर्गम हैं। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि विकलांग लोगों के लिए न्यायपालिका को सुलभ बनाने के लिए हमें बहुत कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि हम इसके लिए सही दिशा में आगे बढ़ रहे है। गौरतलब है कि जस्टिस चंद्रचूड़ सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ समय में सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड में शामिल हो जाएगी। जिसके बाद शीर्ष अदालत के सभी फैसले एक मुफ्त टेक्स्ट सर्च फॉर्मेट में उपलब्ध होंगे, जिसके बाद अदालत के फैसलों तक सभी की आसानी से पहुंच हो सकेगी। 

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सहयोग से एक जजमेंट सर्च पोर्टल भी बनाया है। ये विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के लिए भी मददगार साबित होगा। इसके जरिए विकलांग और अन्य लोगों के लिए भी उच्च न्यायालय के 75 लाख से अधिक फैसले स्वतंत्र और आसानी से उपलब्ध होंगे। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में विकलांग व्यक्तियों के लिए न्यायिक प्रणाली को सुलभ बनाने के लिए किए जा रहे अन्य कामों को भी गिनाया।
विज्ञापन


अपने संबोधन में उन्होंने आशा जताते हुए कहा कि ऐसे और लोग भारतीय अदालतों में न्यायाधीश के रूप में अध्यक्षता करने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति विकलांग व्यक्तियों के लिए भारतीय न्यायिक प्रणाली के डिजिटल बुनियादी ढांचे को और अधिक सुलभ बनाने के लिए काम कर रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें