रिटायरमेंट के बाद राष्ट्रमंडल सचिवालय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (सीसैट) में नामांकन के लिए सहमति वापस लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके सीकरी चाहते हैं कि यह विवाद अब खत्म हो जाए। देश पूर्व प्रधान न्यायाधीश वाई के सभरवाल के जीवन आधारित पुस्तक के विमोचन समारोह के बाद जस्टिस सीकरी ने कहा, ‘मैं किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता। मैं चाहता हूं कि यह विवाद यहीं खत्म हो जाए।’ इसके अलावा उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
दरअसल, सीबीआई निदेशक पद से आलोक वर्मा को हटाए जाने का फैसला जिस उच्चस्तरीय चयन समिति ने लिया जस्टिस सीकरी उसके सदस्य थे। उसके बाद मीडिया में उनके सीसैट के लिए नामांकन की खबरें आईं, जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाए थे। इसके चलते उन्होंने रविवार को ही सहमति वापस ले ली थी।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील आरोपों को निराधार बताते हुए जस्टिस सीकरी के समर्थन में आ गए हैं। देश के पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि कुछ सियासी लोग और एक्टिविस्ट वकील जस्टिस सीकरी को गलत तरीके से निशाना बना रहे हैं। लोगों को तथ्य नहीं पता है। सीसैट नामांकन और चयन समिति का फैसला अलग तथ्य है। हाईकोर्ट के पूर्व जज एके सिन्हा और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने भी घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
सिन्हा ने कहा, जस्टिस सीकरी ने बीते साल दिसंबर में सीसैट के लिए मौखिक मंजूरी दी थी। जबकि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति में चीफ जस्टिस ने उन्हें जनवरी में नामित किया। जो लोग विवाद खड़ा कर रहे हैं वे बार और कोर्ट दोनों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।