सुर्खियों में बने हुए ट्रिपल तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में 6 दिन तक सुनवाई चली। पांच जजों की पीठ में चीफ जस्टिस जेएस खेहर समेत जस्टिस कुरियन जॉसेफ, आरएफ नरीमान, यू यू ललीत और अब्दुल नजीर जैसे बड़े जज शामिल थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी जजों ने इस दौरान सवाल किए, लेकिन जस्टिस अब्दुल नजीर ने छह दिनों में एक सवाल नहीं किया।
उनकी खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है। बताया जा रहा है कि वे इस मामले के अच्छे जानकार है और उन्हें इस जुड़े कानूनी दांव-पेचों की हर खबर है, पर वे फिर भी चुप्पी साधे बैठे रहे। बता दें कि इससे जुड़ा पहले भी एक मामला सामने आया, जब गुड फ्राइडे पर चीफ जस्टिसिस कॉन्फ्रेंस 2015 आयोजित की गई। जस्टिस जॉसेफ इस दिन कॉन्फ्रेंस में नहीं पहुंचे। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा था कि सभी धर्मों के पवित्र दिवसों को समान महत्व दिया जाना चाहिए।
जब कोर्ट में मुस्लिम पर्सनल लॉ बॉर्ड ये कह रहा था कि ये धर्म का मामला है, इसे कोर्ट में उछाला नहीं जा सकता। उसी बीच कहा गया कि ये मामला महिलाओं को समान अधिकार का है। बता दें कि इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता सायरा बानो के वकील अमित चड्ढा गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के सामने पेश हुए।
चड्ढा ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि मेरी नजर में ट्रिपल तलाक पाप है। इस सुनवाई के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के रुख में नर्मी आई है और उसने कहा है कि तीन तलाक से बचा जाए।मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की दलीलों का जवाब देते हुए सिब्बल ने कहा था कि तीन तलाक एक खत्म होती परंपरा है। इसलिए इस परंपरा को चुनौती देने से यह परंपरा फिर से जिंदा हो सकती है। इस पर केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सती प्रथा और छुआछूत का उदाहरण दिया।