जुलाई माह में औसत से 7% ज्यादा बारिश हुई है लेकिन कहीं ज्यादा तो कहीं कम। मानसून के असमान वितरण के लिए जलवायु परिवर्तन को कारण माना जा रहा है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार जहां राजस्थान और लद्दाख जैसे इलाकों में सामान्य से बेहद अधिक बारिश दर्ज की गई, वहीं पूर्वोत्तर के कई राज्यों और दिल्ली जैसे इलाकों में वर्षा में भारी गिरावट देखने को मिली है। इस असमान वितरण को जलवायु परिवर्तन से उपजा एक स्पष्ट संकेत मान सकते हैं। पूरे देश में जुलाई के दौरान केवल दो राज्य ऐसे रहे जहां बहुत अधिक बारिश दर्ज की गई। राजस्थान में सामान्य से 89 फीसदी और लद्दाख में 161 फीसदी अधिक वर्षा दर्ज की गई। वहीं चार राज्य ऐसे हैं जहां सामान्य से अधिक वर्षा हुई है और 23 राज्यों में वर्षा को सामान्य श्रेणी में रखा गया है।
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उत्तर प्रदेश में एक से 29 जुलाई तक सामान्य से 8 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई। हालांकि यह कमी सीमित रही, इसलिए भारतीय मौसम विभाग ने राज्य को सामान्य वर्षा की श्रेणी में रखा है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा का यह असमान वितरण कृषि और जल आपूर्ति को लेकर चिंता का कारण बन सकता है, विशेषकर उन जिलों में जहां पहले से ही जल स्तर कम है। वहीं पूर्व और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में वर्षा में भारी गिरावट दर्ज की गई। मेघालय में सामान्य से 56 फीसदी कम बारिश हुई है, जिसे वर्षा में भारी कमी की श्रेणी में रखा गया है।
उत्तर-पश्चिम भारत में मिश्रित तस्वीर
उत्तराखंड में सामान्य 567 मिमी वर्षा हुई, जबकि हरियाणा में 12 फीसदी अधिक वर्षा दर्ज की गई। चंडीगढ़ में नौ फीसदी की गिरावट रही, परंतु दोनों राज्यों को भी सामान्य श्रेणी में ही रखा गया है। दिल्ली में 26 फीसदी कम केवल 178.1 मिमी बारिश हुई। हिमाचल में आठ फीसदी अधिक वर्षा हुई, जबकि जम्मू-कश्मीर में 10 फीसदी की कमी रही। वहीं, मध्य भारत में बारिश संतोषजनक रही। यहां सामान्य से 55 फीसदी अधिक वर्षा हुई।
- जबकि गुजरात में 33 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। दमन, दादरा और नगर हवेली में 25 ,ओडिशा में 13 और छत्तीसगढ़ में 14 फीसदी अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। महाराष्ट्र और गोवा में सामान्य के आसपास वर्षा रही। दक्षिण भारत में सामान्य वर्षा हुई है।
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मेघालय जिसका शाब्दिक अर्थ है बादलों का घर, अब अपने नाम के अनुकूल नहीं रह गया है। यह राज्य, जो दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों मासिनराम और चेरापूंजी के लिए जाना जाता है, आज गहराते सूखे की चपेट में है। राज्य में वर्तमान मानसून के दौरान देश में सबसे अधिक 56% वर्षा की कमी दर्ज की गई है। 1 जून से 28 जुलाई तक मेघालय में केवल 690.7 मिमी वर्षा हुई, जबकि औसत सामान्य वर्षा 1,555.4 मिमी होनी चाहिए थी। वहीं, सूखा माने जाने वाला राज्य झारखंड इस बार मेघालय से आगे निकल गया, जहां 732.6 मिमी वर्षा हुई यानी सामान्य से 53% अधिक। इससे स्पष्ट होता है कि पूर्वोत्तर भारत का यह अत्यधिक आर्द्र राज्य अब एक मध्यम से गंभीर शुष्कता की ओर बढ़ रहा है।