वर्ष 1949 में बाबरी मस्जिद में भगवान राम कि मूर्ति मिलने के बाद से लेकर वर्ष 1992 में मुद्दे के राजनीतिकरण और दंगों के बाद से अयोध्या, आध्यात्म और राम नगरी के नाम से कम बल्कि विवाद को लेकर ज्यादा चर्चाओं में बना हुआ है। अयोध्या राम मंदिर विवाद देश के उन खास मुद्दों में से एक है जो अब तक राजनीतिज्ञों और हर चुनाव का अहम धर्म से जुड़ा विषय बना हुआ है।
ये एक ऐसा विवाद है जिस पर आने वाले फैसले का इंतजार देश का प्रत्येक व्यक्ति सालों से कर रहा है। अयोध्या विवाद के तमाम घटनाओं में जिला जज एम पांडे से जुड़ा वृत्तांत भी अहम है। फैसले के बाद से तत्कालीन जिला जज के एम पांडे को धमकियां मिलनी शुरू हो गई थीं।
एक रिपोर्ट के अनुसार जिला जज एम पांडे के साथ, सीजेएम रहे सी डी राय ने कहा कि, फैसला देने के करीब एक हफ्ते बाद पांडे जी को धमकी भरे खत मिलने शुरू हो गए। राय साहब बताते हैं कि जिला जज के पास औसतन 30 से 35 चिट्ठियां रोज आने लगीं। इनमें 2-3 चिट्ठियों को छोड़ कर बाकि सभी चिट्ठियों में उन्हें धमकियां दी गई थीं।
बता दें कि जिला जज पांडे को कई देशों से जान से मारने की धमकियां मिली थी और चिट्ठियां सिर्फ हिंदी नहीं कई भाषाओं में थीं। अफगानिस्तान, सऊदी अरब समेत तमाम देशों और भाषाओं में धमकी भरी चिट्ठियां जज को मिली थीं।
जिसके मद्देनजर उनकी सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन के साथ-साथ उनके साथी अफसर भी चिंतित थे। उस समय जिला जज के पास सुरक्षा और ऑफिस जाने के लिए वाहन भी नहीं होते थे। बता दें कि, फैसले वाले दिन जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने स्वयं उन्हें घर तक छोड़ा था। इसके बाद सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए नियमावली में संशोधन किया और तत्काल उन्हें सरकारी वाहन उपलब्ध कराया गया था साथ ही घर से लेकर दफ्तर तक उनकी सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी।