साल 2014 में जज लोया की कथित संदिग्ध मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं लंबित थी, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने अपने यहां स्थानांतरित कर दिया।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र की अगुवाई वाली बेंच में ये फैसला दिया। बेंच ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट और नागपुर बेंच में इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में होगी।
जज लोया की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने 4 जनवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।
लोया केस की सुनवाई करने वाली बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्र के अलावा जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि यह विषय बेहद गंभीर है और इस मामले में सभी पक्षों को सुनना जरूरी है। अब सुप्रीम कोर्ट इन सभी केसों की एक साथ सुनवाई करेगा, मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं से जुड़े सभी दस्तावेजों को सुप्रीम कोर्ट को सौंपने का आदेश देते हुए कहा, "हमें सभी दस्तावेजों को पूरी गंभीरता के साथ देखना होगा।"
महाराष्ट्र सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने पूरी जानकारी
सुप्रीम कोर्ट को दी।
बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने वाली अधिवक्ताओं की संस्था की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का नाम लिया तो बेंच ने इस पर नाराजगी जताई।
सुनवाई के दौरान दवे ने आरोप लगाया कि उन्हें (शाह) को बचाने के लिए सब कुछ किया गया है।
दवे के इस आरोप का हरीश साल्वे ने कड़ा विरोध किया। इसके बाद बेंच ने कहा, "अभी तक, ये प्राकृतिक मौत है। फिर, इस तरह के आरोप न लगाएं।"
सोहराबुद्दीन अनवर हुसैन शेख की 26 नवंबर 2005 की फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी। इस हत्या के एक चश्मदीद गवाह तुलसीराम प्रजापति भी दिसंबर 2006 में एक 'मुठभेड' में मारे गए।
सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसर बी की भी हत्या कर दी गई थी।
इन हत्याओं के आरोप गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह पर लगे। इन्हीं मामलों में बाद में उनकी गिरफ्तारी भी हुई।
फिर सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में जाँच चलती रही। अदालत के आदेश पर अमित शाह को राज्य-बदर कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई गुजरात से बाहर करने, सुनवाई के दौरान जज का तबादला न करने जैसे कई निर्देश दिए।
सीबीआई के विशेष जज जे टी उत्पत ने अमित शाह को मई 2014 में समन किया। शाह ने सुनवाई में हाजिर होने से छूट मांगी लेकिन जज उत्पत ने इसकी इजाजत नहीं दी, इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 26 जून 2014 को उनका तबादला कर दिया गया।
इसके बाद ये मामला जज लोया को सौंप दिया गया, मामले में
अमित शाह जज लोया की अदालत में भी पेश नहीं हुए। एक दिसंबर 2014 को लोया की मौत नागपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
जज लोया की जगह नियुक्त जज एमबी गोसावी ने जांच एजेंसी के आरोपों को नामंजूर करते हुए अमित शाह को दिसंबर 2014 में आरोपमुक्त कर दिया था।