सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति वी गोपाल गौड़ा ने बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के अन्य नेताओं से आपराधिक षडयंत्र का आरोप हटाने से संबंधित अपील से खुद को अलग कर लिया है।
हालांकि उन्होंने इसका कोई कारण नहीं बताया। मालूम हो कि इससे पहले जस्टिस यूयू ललित ने भी खुद को अयोध्या मामले से जुड़ी याचिका की सुनवाई से अलग कर लिया था।
न्यायमूर्ति गौड़ा ने मामले को भारत के प्रधान न्यायाधीश के पास भेजते हुए दूसरी पीठ का गठन करने का अनुरोध किया है। इस दो सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता न्यायमूर्ति गौड़ा ही कर रहे थे।
पीठ के दूसरे सदस्य न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा थे। अपील हाजी महबूब अहमद और सीबीआई की ओर से दाखिल की गई है। सीबीआई ने भाजपा नेता आडवाणी, कल्याण सिंह, जोशी समेत 18 नेताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर रखी है।
निचली अदालत ने इन नेताओं के खिलाफ ढांचा गिराए जाने की साजिश का आरोप हटा दिया था। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया था।