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Manipur: न्यायामूर्ति केम्पैया सोमशेखर बने मणिपुर के नौवें मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल अजय भल्ला ने दिलाई शपथ

Thu, 22 May 2025 07:37 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र एन. अर्जन, अमर उजाला, इंफाल

सार

कॉलेजियम ने 15 मई को जस्टिस सोमशेखर की पदोन्नति की सिफारिश की थी। केंद्रीय विधि मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर न्यायमूर्ति सोमशेखर को मणिपुर उच्च न्यायालय का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की घोषणा की।
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जस्टिस सोमशेखर ने ली मणिपुर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पद की शपथ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मणिपुर उच्च न्यायालय के नामित मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति केम्पैया सोमशेखर ने गुरुवार को मणिपुर उच्च न्यायालय के नौवें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इंफाल स्थित राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में न्यायमूर्ति केम्पैया सोमशेखर को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। 
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कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति केम्पैया सोमशेखर को भारत के राष्ट्रपति द्वारा 20 मई को मणिपुर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। शपथ ग्रहण समारोह में मणिपुर उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, मुख्य सचिव, मणिपुर सरकार के सुरक्षा सलाहकार, पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ सिविल, पुलिस, सैन्य एवं न्यायिक अधिकारी तथा बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। 
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उल्लेखनीय है कि कॉलेजियम ने 15 मई को जस्टिस सोमशेखर की पदोन्नति की सिफारिश की थी। केंद्रीय विधि मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर न्यायमूर्ति सोमशेखर को मणिपुर उच्च न्यायालय का अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की घोषणा की।
 
संविधान महज एक कानूनी दस्तावेज नहीं: सोमशेखर
न्यायमूर्ति केम्पैया सोमशेखर ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के विदाई समारोह में कहा था, संविधान महज एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक अनुबंध और नैतिक दिशानिर्देश है। न्यायाधीश ने कहा, मैं संविधान और कानून के शासन के प्रति अपनी निष्ठा की पुष्टि करता हूं। मैं सर्वशक्तिमान का आशीर्वाद और सभी की सद्भावना की कामना करता हूं, ताकि मैं अपने पद की गरिमा को बनाए रख सकूं, पवित्रता बनाए रख सकूं और हमारे बहुलवादी लोकतंत्र में न्याय प्रदान करने की प्रणाली में सार्थक योगदान दे सकूं। हमें खुद को याद दिलाना चाहिए कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि एक सामाजिक अनुबंध और एक नैतिक दिशा-निर्देश है। इसका मार्गदर्शक दर्शन यह सुनिश्चित करना है कि न्याय कागज पर लिखा वादा न होकर वास्तविकता हो।"
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