साल 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में सुनवाई कर रही विशेष एनआईए अदालत के न्यायाधीश ए.के. लाहोटी का तबादला कर दिया गया है। यह तबादला जिला न्यायाधीशों के वार्षिक तबादला नीति के तहत किया गया है और उन्हें अब नासिक में तैनाती दी गई है। गौरतलब है कि यह तबादला ऐसे समय किया गया है, जब मालेगांव विस्फोट मामले को अदालत द्वारा फैसले से पहले सुरक्षित रखा जाना है। मालेगांव विस्फोट के पीड़ितों ने जज लाहोटी के तबादले पर नाराजगी जाहिर की है और उनका कहना है कि इससे न्याय मिलने में और देरी होगी। अब पीड़ित इसे लेकर बॉम्बे उच्च न्यायालय में अपील दायर करने पर विचार कर रहे हैं कि जज लाहोटी के कार्यकाल को विस्तार दिया जाए।
क्या कहा गया है आदेश में
बॉम्बे उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा तबादले का आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत जजों का तबादला आदेश 9 जून को गर्मी की छुट्टियों के बाद लागू होगा। आदेश में कहा गया है कि जिन न्यायिक अधिकारियों का तबादला हुआ है, वे सुनवाई पूरी कर चुके मामलों में फैसला सुनाएं। मालेगांव विस्फोट मामले में शनिवार को पिछली सुनवाई में न्यायाधीश लाहोटी ने अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष को 15 अप्रैल तक शेष दलीलें पूरी करने का निर्देश दिया था। बचाव पक्ष का कहना है कि उम्मीद थी कि वे अगले दिन मामले को निर्णय के लिए सुरक्षित रख सकते थे।
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पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील शाहिद नदीम ने कहा, 'हम उच्च न्यायालय में एक आवेदन दायर करने पर विचार कर रहे हैं। हमने पहले भी मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र दिया था जिसमें फैसला आने तक जज का कार्यकाल बढ़ाने का अनुरोध किया गया था।' अभियोजन पक्ष ने मुकदमे के दौरान 323 गवाहों की जांच की, जबकि बचाव पक्ष ने आठ गवाहों की जांच की।
मालेगांव विस्फोट में भाजपा नेता प्रज्ञा ठाकुर हैं आरोपी
29 सितंबर, 2008 को उत्तरी महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव शहर में एक मस्जिद के पास विस्फोट हुआ था। यह विस्फोट मोटरसाइकिल में लगे विस्फोटक में हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इस मामले में भाजपा नेता प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और पांच अन्य पर मुकदमा चल रहा है। आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत मुकदमा चल रहा है।