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'सूखे से मर गईं 10,000 गाय, इस पर बहस कब होगी'

Thu, 02 Jun 2016 05:24 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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भीषण सूखे से गुजर रहे बुंदेलखंड में कम से कम तीन लाख मवेशी मर चुके हैं। - फोटो : dailymail
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देश में गाय और बीफ के मुद्दे चरम पर हैं हाल ही में अखलाख मर्डर केस में आई फोरेंसिक रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों में फिर से हलचल पैदा कर दी है। वहीं स्वराज अभियान एनजीओ के सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने दावा किया है कि सूखा प्रभावित क्षेत्र में लगभग तीन लाख मवेशी अकेले मई महीने में मारे गए हैं।
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योगेंद्र यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि भाजपा का गाय प्रेम केवल टीवी अखबारों में दिखने के लिए है। जहां पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व गाय को राष्ट्रमाता बनाने और बीफ बिक्री को लेकर डिवेट में उलझा रहता है। वहीं भीषण सूखे से गुजर रहे बुंदेलखंड में कम से कम तीन लाख मवेशी मर चुके हैं। 

उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के 13 जिलों में मवेशियों के शव पटे पड़े हैं

क्षेत्र में भयानक दुर्गंध फैली हुई है जो बड़े पैमाने पर बीमारी का कारण बन सकती - फोटो : dailymail
बुधवार को नई दिल्ली में योगेंद्र यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के 13 जिलों में मवेशियों के शव पटे पड़े हैं। क्षेत्र में भयानक दुर्गंध फैली हुई है जो बड़े पैमाने पर बीमारी का कारण बन सकती है। वहीं भाजपा के यूपी प्रवक्ता चंद्र मोहन ने राज्य सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया है, उनका कहना है कि बुंदेलखंद की बर्बादी के लिए राज्य की समाजवादी सरकार जिम्मेदार है।

मोहन ने कहा, 'हमने (केंद्र सरकार ने) राज्य को पानी की ट्रेन भेजने की पेशकश की लेकिन अपनी जिद के चलते उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया। मोहन ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा ‌‌‌‌कि उनके सभी जिला लेवल के अधिकारी और कमिश्नर भ्रष्ट हैं कोई भी सूखे से संबंधित सही आंकड़े नहीं दे रहा है।

वहीं हम सेंट्रल लेवल पर सभी बुंदेलखंड के सांसद इन सूखा प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों की मदद कर रहे हैं। एनजीओ के अनुसार उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में 11,065 गांव हैं, सभी गांवों में औसत 10 से 100 मवेशियों की मृत्यु मई में हुई है इस हिसाब से अकेले मई में पूरे रीजन में कम से कम तीन लाख मवेशियों की मौत हुई है। 

योगेंद्र यादव ने आरोप लगया है कि वहां हर जगह चारे की कमी है, चारा बैंक स्कीम केवल पेपर पर ही है, किसी को नहीं पता है कि यह क्या स्कीम है और इसका क्या लाभ हो सकता है। अगर स्कीम होगी भी तो केवल नेताओं के लिए या उनके रिश्तेदारों के लिए जिनके पास कोई भी मवेशी नही होगा सिर्फ पैसे हड़पने के लिए स्कीमें लांच की जाती हैं।
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10 राज्यों के 33 करोड़ लोग सूखे से प्रभावित हो रहे हैं

सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव - फोटो : getty image
13 मई को सूखे से निपटने के पुख्ता इंतजाम न करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को जमकर फटकार लगाई थी। न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और एनवी रमण की खंडपीठ ने कहा, "आप धन की कमी का बहाना बना कर अपनी जिम्मदारी से भाग नहीं सकते" शीर्ष अदालत ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) और मिड डे मील योजना के पीड़ितों को राहत के लिए दिशा-निर्देश पारित किए हैं।

लगातार दो वर्षों से औसत से कम बारिश के कारण देश का बड़ा हिस्सा सूखे की चपेट में हैं। पिछले साल मानसून सामान्य से 14 प्रतिशत कम रहा जो 2014 से 12 प्रतिशत कम था। जिससे देश के फसल क्षेत्र के आधे एरिया की सिंचाई नहीं हो पाई।

सरकार ने अप्रैल में संसद को बताया कि अब तक 11 राज्यों के 266 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। 10 राज्यों के करोड़ लोग सूखे से प्रभावित हो रहे हैं। स्थिति में सुधार की उम्मीद बरकरार है, भारत के मौसम विज्ञान विभाग ने इस वर्ष औसत से अधिक मानसून होने से बारिश अच्छी होने की उम्मीद की है।
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