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JP Narayan: प्रो. आनंद कुमार ने कहा- लोकतंत्र बचाने के लिए आपसी मतभेद भूलकर साथ आएं लोग

Sun, 09 Oct 2022 04:59 PM IST
अभिषेक दीक्षित डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कार्यक्रम में सुरेश खैरनार, छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक कुमार शुभमूर्ति, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।
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लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्य तिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रो. आनंद कुमार और अन्य - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक प्रो. आनंद कुमार ने कहा है कि यह समय देश के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है और देश की लोकतांत्रिक पद्धति को बचाए रखने वाली संस्थाओं पर भी गंभीर संकट मंडरा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बचाए रखना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है और इसके लिए सभी लोगों को साथ आना चाहिए। इस बड़े उद्देश्य के लिए लोगों को आपसी असहमति को टकराव का कारण नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने यह बात संपूर्ण क्रांति के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्य तिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही।   

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जेएनयू के प्रो. आनंद कुमार ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस देश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करने के लिए कई पीढ़ियों ने अपना योगदान दिया है। लेकिन अब निहित स्वार्थों के कारण इसे नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। यह देश के लोगों की जिम्मेदारी है कि वे इस खतरे को समझें और इसे कामयाब न होने दें। उन्होंने कहा कि समाज के सभी लोगों का हित तभी सुरक्षित रहेगा जब इस देश में लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा, लिहाजा यह सबके साझे हितों की लड़ाई है और इसे समझा जाना चाहिए।   

अपने प्रमुख सम्बोधन में जेपी आंदोलन में अग्रणी प्रमुख भूमिका निबाहने वाले प्रख्यात समाजशास्त्री जेएन यू के चर्चित प्रोफेसर आनंद कुमार ने 1942 और 1974 के जेपी और आंदोलन के दौर की विषमताओं-विशेषताओं का सिलसिलेवार वर्णन किया और कहा कि उस समय आंदोलनकारियों को तानाशाही के विरोध करने और लोकतंत्र की रक्षा हेतु संघर्ष में किन-किन तरह की दुश्वारियों का सामना करना पडा़ था, लेकिन आंदोलन के महानायक जयप्रकाश जी के नेतृत्व का ही परिणाम रहा कि आंदोलन में न केवल कामयाबी मिली,  बल्कि तानाशाही सरकार को उखाड़ने और जनता की सरकार बनाने में भी सफल हुए। 
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उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि आज भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है और हालात उससे भी भयावह हैं। समय की मांग है कि लोकतंत्र की रक्षा की दिशा में किये जा रहे यज्ञ में सभी लोग आपसी मतभेद-मनभेद भुलाकर जी जान से कूद पडे़ं क्योंकि याद रखो लोकतंत्र बचेगा, तो हम बचेंगे, देश बचेगा। 

कार्यक्रम में सुरेश खैरनार, छात्र युवा संघर्ष वाहिनी के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक कुमार शुभमूर्ति, गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव अरुण श्रीवास्तव भी उपस्थित रहे।

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