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असम में बाढ़ से हालात और बिगड़े, अब जेपी नड्डा और राहुल ने भी की कार्यकर्ताओं से अपील

Tue, 16 Jul 2019 10:27 PM IST
अमर शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राहुल गांधी, जेपी नड्डा - फोटो : PTI
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भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने असम में बाढ़ से हुई तबाही पर चिंता जताई है और प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने की गुहार लगाई है। इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी भी उत्तर प्रदेश, बिहार समेत उत्तर पूर्व राज्यों में बाढ़ प्रभावितों की मदद की अपील की।
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नड्डा ने कहा, "असम में आई बाढ़ हम सभी के लिए चिंता का कारण है। मैं प्रभावित परिवारों के साथ अपनी सहानुभूति व्यक्त करता हूं। हमारी पार्टी असम के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हमारे विचार शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं।" 

नड्डा ने आगे कहा, "मैं युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करता हूं। केंद्र सरकार भी राज्य को पूरा सहयोग प्रदान कर रही है। मैं भाजपा के कार्याकर्ताओं से सभी संभावित तरीकों से प्रभावितों की मदद करने का आग्रह करता हूं।" 
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राहुल गांधी ने भी मदद की अपील

इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं से बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने की अपील की। 

गांधी ने ट्वीट कर कहा, "असम, बिहार, उतर प्रदेश, त्रिपुरा और मिजोरम में बाढ़ से हालात बेकाबू हो गए है। जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। मैं इन सभी राज्यों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं वे आम लोगों के राहत और बचाव कार्य में तत्काल जुटे।" 
 

बाढ़ से बेहाल

बिहार व पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ से 70 लाख से अधिक नागरिक प्रभावित हुए हैं, 44 की मौत हुई है। असम के 33 में से 31 जिलों के 43 लाख नागरिक बाढ़ की चपेट में हैं। यहां 15 नागरिकों को मौत हुई है। बिहार में 12 जिलों की 25 लाख से अधिक का जनजीवन प्रभावित हुआ है, यहां सोमवार शाम तक 24 की मौत हुई है।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने बाढ़ राहत कार्यों के लिए के लिए देश में कुल 119 टीमें लगाई गई हैं। हर टीम में 45 सदस्य हैं। टीमों ने असम में करीब 3000 लोगों को बचाया है।
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असम में आई बाढ़ से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 150 से अधिक शिकार रोकथाम शिविर प्रभावित हुए हैं। हालांकि इस राष्ट्रीय उद्यान में शिकार पर लगाम लगाने के लिये अधिकारी 24 घंटे काम कर रहे हैं। कांजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में शामिल है। 

उद्यान के कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी किसी भी संभावित घटना से निपटने के लिये देसी और मशीनीकृत नौकाओं की मदद से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। असम के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार राज्य के गोलाघाट और नगांव जिलों में स्थित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का 90 फीसदी हिस्सा अब तक जलमग्न है।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) के संभागीय वन अधिकारी रोहिणी बल्लभ सैकिया ने कहा कि वन सुरक्षाकर्मियों के अलावा राज्य आपदा राहत बल (एसडीआरएफ) की टीम भी उद्यान के संवेदनशील स्थानों पर असम पुलिस के साथ तैनात है।

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक सींग वाले भारतीय गैंडे की दुनिया में सबसे अधिक आबादी है। यहां बाघ, हाथी, भालू (स्लॉथ बियर), बंदर और कस्तूरी हिरन जैसे अन्य जानवर भी हैं। बयान के अनुसार कुछ जानवरों ने उद्यान के अंदर स्थित ऊंचे स्थानों पर शरण ली है और कई राष्ट्रीय राजमार्ग 37 को पार कर कार्बी आंगलोंग में ऊंचाई वाली जगहों पर चले गये हैं।

केएनपी का 90 प्रतिशत हिस्सा जलमग्न है हालांकि उद्यान के अंदर जलस्तर और पास के एनएच-37 से कुछ हद तक पानी घटा है, जिससे राजमार्ग पर मंगलवार को भारी वाहनों की आवाजाही बहाल हो गयी।
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