भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष अमित शाह के गृह मंत्री के बनने का मतलब है कि पार्टी को एक उपयुक्त अध्यक्ष खोजना होगा, जिससे पार्टी उत्तराधिकारी और इसकी नियुक्ति को लेकर अटकलें लगने लगी हैं। पिछली नरेंद्र मोदी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, और राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव, शाह को बदलने के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं।
मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के दो महीने बाद जुलाई 2014 में शाह ने राजनाथ सिंह से पदभार संभाला और उन्होंने सिंह को गृह मंत्री नियुक्त किया। लेकिन तब और अब के बीच अंतर है। किसी भी भाजपा अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। राजनाथ सिंह ने 2013 में नितिन गडकरी से भाजपा अध्यक्ष का पद संभाला था, और 2014 में पार्टी पद से इस्तीफा देने के बाद उनका कार्यकाल खत्म होने में डेढ़ साल का समय बचा था।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "ऐसी स्थिति में किसी भी चुनाव की आवश्यकता नहीं है और शाह को शेष कार्यकाल के लिए पार्टी का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है, भाजपा की राष्ट्रीय परिषद ने उनके चुनाव की पुष्टि की और उन्होंने कार्यभार संभाला।"
याद हो तो शाह ने राजनाथ के शेष कार्यकाल को पूरा किया था और जनवरी 2016 में भाजपा अध्यक्ष के रूप में फिर से निर्वाचित हुए थे। उनका कार्यकाल जनवरी 2019 में समाप्त हो गया, लेकिन पार्टी ने उन्हें चुनाव खत्म होने तक विस्तार देने का फैसला किया।
भाजपा के एक दूसरे नेता ने कहा, "एक बार राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद, मंडल से राष्ट्रीय स्तर तक सदस्यता अभियान और संगठनात्मक चुनाव होता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव तभी होता है, जब कम से कम 50% राज्यों में चुनाव खत्म हो जाते हैं।"
पार्टी को अपना सदस्यता अभियान फिर से शुरू करना होगा, और इसमें कम से कम 2-3 महीने लगेंगे। दूसरे नेता ने कहा कि मंडल, जिला और राज्य स्तर पर संगठनात्मक चुनाव में कुछ और महीने लगेंगे।
भाजपा की तात्कालिक चुनौती हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड और संभवतः जम्मू और कश्मीर में चुनाव है, जो केंद्र सरकार के अधीन है।