पीएम नरेंद्र मोदी ने कर्तव्य पथ पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जिस विशाल प्रतिमा का अनावरण किया है, उसका पत्थर दिल्ली तक लाने का सफर भी काफी चुनौतीपूर्ण रहा। बताया जा रहा है कि 140 पहियों वाला एक 100 फुट लंबा ट्रक ग्रेनाइट का अखंड पत्थर तेलंगाना से लेकर राजधानी पहुंचा था।
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इस दौरान वह पांच राज्यों से गुजरा और रास्ते में पड़ने वाले राजमार्गों पर उसकी आसान निकासी के लिए टोल प्लाजा के गेटों को अस्थायी तौर पर तोड़ना पड़ा। रास्ते में ट्रक के 42 टायर भी फटे, जिससे इसे मंजिल तक पहुंचने में 72 घंटों का ज्यादा समय लगा।
26 हजार मानव घंटों में तैयार हुई मूर्ति
दो जून की रात संग्रहालय में पहुंचने के बाद बोस की मूर्ति निर्माण के लिए पत्थर को तराशने का काम शुरू हुआ। मूर्तिकारों ने 26 हजार मानव घंटों में 28 फुट ऊंची प्रतिमा तैयार की, जिसका वजन 65 मीट्रिक टन है।
प्रतिमा के लिए तेलंगाना के खम्मम स्थित खदान से टेलीफोन ब्लैक स्टोन की आपूर्ति करने वाले ग्रेनाइट स्टूडियो इंडिया के निदेशक रजत मेहता ने पत्थर के सफर के बारे में ज्यादा जानकारी दी।
पांच राज्यों का तय किया सफर
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ट्रक तेलंगाना के बाद महाराष्ट्र की कई जगहों से गुजरते हुए पहले नागपुर पहुंचा। इसके बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा होते हुए आखिरकार दिल्ली आया।
अरुण के नेतृत्व में नक्काशी : पत्थर की नक्काशी एनजीएमए में पारंपरिक तकनीक से हुई। मूर्तिकारों का नेतृत्व मैसूर के अरुण योगीराज ने किया।
मेहता ने बताया, विशालकाय पत्थर 280 मीट्रिक टन वजनी और 32 फुट लंबा था। इसकी ऊंचाई 11 और चौड़ाई 8.5 फुट थी।