घरों में पड़ी दरारें
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जोशीमठ में भू-धंसाव की स्थिति किस दिन सामने आई?
दिसंबर के महीने में क्षेत्र में कई जगहों पर भू-धंसाव की घटनाएं आई थीं। शहर के मनोहर बाग वार्ड, गांधी वार्ड और सिंधार वार्ड में लोगों ने घरों में दरार आने की बातें कही थी। नगर क्षेत्र में भू-धंसाव से मकानों के साथ कृषि भूमि के भी प्रभावित होने की घटनाएं आईं। यहां खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी और कई जगहों पर तो खेतों की दरारें एक फीट तक चौड़ी हो गईं।
जोशीमठ में घरों पर पड़ी दरारें
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दो जनवरी: अचानक दीवारों में आई दरारें
भू-धंसाव का सिलसिला दो जनवरी की रात सामने आया जब कई मकानों में अचानक बड़ी दरारें आ गईं। मारवाड़ी वार्ड में स्थित जेपी कंपनी की आवासी कॉलोनी के पीछे पहाड़ी से रात को ही अचानक मटमैले पानी का रिसाव भी शुरू हो गया। भू-धंसाव से ज्योतेश्वर मंदिर और मंदिर परिसर में दरारें आ गई। सिंहधार वार्ड में बहुमंजिला होटल माउंट व्यू और मलारी इन जमीन धंसने से तिरछे हो गए।
जोशीमठ पहुंची शासन की टीम
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तीन जनवरी: शुरू हुआ राहत-बचाव कार्य
जोशीमठ रॉक से पानी रिसता दिखाई दिया। जमीन से निकल रहा पानी खेतों की दरारों में घुस रहा था इससे खतरा और बढ़ गया। नगर के सभी नौ वार्डों में किसी न किसी मकान में दरारें आई। प्रशासन ने पांच प्रभावित परिवारों को शिफ्ट किया जबकि कई प्रभावित घर छोड़कर चले गए।
चार जनवरी: हेल्पलाइन नंबर जारी, रोपवे का संचालन बंद
जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव ने चार जनवरी को विकराल रूप ले लिया। जेपी कॉलोनी के 50 प्रभावितों को जेपी कंपनी ने और अलग-अलग वार्डों से 16 प्रभावित परिवारों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया। वहीं, मारवाड़ी में भूमि से लगातार पानी का रिसाव होने से निचले क्षेत्र के भवन भी खतरे की चपेट में आ गए। सिंहधार वार्ड में स्थित बीएसएनएल के कार्यालय और आवासीय भवनों में भी दरारें आईं। जोशीमठ स्थित औली रोपवे टावर के इर्दगिर्द की जमीन में भी दरारें आ गईं जिसके बाद रोपवे का संचालन बंद कर दिया गया।
पांच जनवरी: पोस्ट ऑफिस कार्यालय का सामान मुख्य डाकघर शिफ्ट
पांच जनवरी को पोस्ट ऑफिस कार्यालय का सारा सामान हटाकर इसको जोशीमठ के मुख्य डाकघर में शिफ्ट कर दिया गया। इसी बीच सिंहधार वार्ड में होटल माउंट व्यू जमीन में धंस गया जिसके बाद प्रशासन ने होटल को खाली करवा दिया।
जोशीमठ में निरीक्षण करती टीम
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छह जनवरी: तेज हुआ बचाव अभियान
भू-धंसाव का क्षेत्र सेना और आईटीबीपी के मुख्यालय की ओर बढ़ना शुरू हो गया। सेना मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़क में भी दरारें दिखीं। जिला प्रशासन की 6 टीमें घर-घर जाकर सर्वे करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने मे जुटी रहीं। सुरक्षा को देखते हुए दो होटलों माउंट व्यू और मलारी इन को प्रशासन ने बंद कराया। सभी निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई। विशेषज्ञों का एक दल स्थिति का मुआयना करने के लिए जोशीमठ पहुंचा। गढ़वाल कमिश्नर सुशील कुमार, आपदा प्रबंधन सचिव रन्जीत कुमार सिन्हा सहित विशेषज्ञों की पूरी टीम ने क्षेत्र में भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे किया।
सीएम धामी पहुंचे जोशीमठ
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सात जनवरी: जोशीमठ पहुंचे मुख्यमंत्री धामी
भू-धंसाव मामले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सात जनवरी को राज्य सचिवालय में उच्चस्तरीय बैठक की जिसमें कई अहम निर्णय लिए गए। इसी दिन गढ़वाल आयुक्त सुशील कुमार ने सुरक्षा के दृष्टिगत जोशीमठ में तत्काल एनडीआरएफ दल की तैनाती के निर्देश दिए। एनटीपीसी के अधिकारियों ने भी औली से लेकर जोशीमठ नगर में विशेषज्ञों की टीम के साथ प्रभावित क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ पहुंचकर शहर के भू-धंसाव क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। प्रशासन ने प्राकृतिक आपदा में बेघर हुए परिवारों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 6 माह तक 4 हजार रुपए प्रतिमाह की दर से किराया देने की घोषणा की।
पीएम मोदी
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आठ जनवरी: PM मोदी ने जानकारी ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से फोन पर बात करके जोशीमठ की ताजा स्थिति की जानकारी ली। उत्तराखंड के मुख्य सचिव डॉ. सुखवीर सिंह संधू ने शहर पहुंचकर भू-धंसाव क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने शहर के मारवाड़ी वार्ड में घर-घर जाकर भू-धंसाव स्थिति का जायजा लिया।
जोशीमठ में राहत कार्य
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नौ जनवरी: प्रभावित लोगों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण
जिलाधिकारी ने भवन सर्वे के लिए नियुक्त नोडल अधिकारियों से सर्वे कार्य जल्द पूर्ण करने को कहा। जिला प्रशासन ने शहर के चार वार्डों में कई स्थानों को असुरक्षित घोषित किया और इन्हें खली करवाने के निर्देश भी दिए। मेडिकल टीम ने शहर में प्रभावित लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवा एवं चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई।
पीड़ितों से मिले अजय भट्ट
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10 जनवरी: केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा
रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट 10 जनवरी को प्रभावित क्षेत्र पहुंचे। उन्होंने आर्मी कैंप सहित नगर क्षेत्र में भूधंंसाव स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित लोगों से मिले। इसके साथ ही नगर क्षेत्र अंतर्गत गांधीनगर, मनोहरबाग, सिंग्धार व सुनील वार्ड को असुरक्षित घोषित करते हुए इन वार्डों को खाली कराया गया। प्रशासन ने सिंहधार वार्ड में बहुमंजिला होटल माउंट व्यू और मलारी को ध्वस्त करने का आदेश दिया।
प्रभावितों से मिले सीएम पुष्कर सिंह धामी
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11 जनवरी: मुख्यमंत्री का दूसरा दौरा
मुख्यमंत्री के सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने 11 जनवरी को प्रेसवार्ता की और बताया कि सुरक्षा के दृष्टिगत जोशीमठ में अभी केवल दो होटलों को डिस्मेंटल किया जा रहा है। जो आसपास के अन्य भवनों को खतरा बने हुए है। प्रभावित परिवारों को तत्कालिक रूप से 1.5 लाख की अंतरिम सहायता दी जा रही है। इसी दिन मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने जोशीमठ पहुंचकर भू-धंसाव से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
राज्य सरकार ने प्रभावित भवन स्वामियों/परिवारों के अध्यासन/विस्थापन के लिए शासन से 45 करोड़ की धनराशि विशेष पुनर्वास पैकेज एवं एकमुश्त ग्रान्ट दिये जाने की अनुमति दी।
बैठक लेते सीएम पुष्कर सिंह धामी
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क्या है जोशीमठ की ताजा स्थिति?
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने गुरुवार को जोशीमठ अंतर्गत सुनील आइटीबीपी कैंप में सेना, ITBP, NDRF और भू-धंंसाव की जांच में लगे विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों, जिला प्रशासन, पुलिस एवं आवश्यक सेवाओं से जुड़े जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने लोगों की सुरक्षा के दृष्टिगत सभी इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठानों के वैज्ञानिकों से वार्ता कर जोशीमठ में भू-धंंसाव के कारणों पर चल रहे अध्ययन और शोध के बारे में भी जानकारी ली।
सीएम पुष्कर सिंह धामी
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आगे क्या है सरकार की तैयारी?
जोशीमठ भू-धंसाव प्रभावितों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए सरकार अलग नीति बना सकती है। इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में 13 जनवरी को कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाई गई है। प्रदेश में आपदा प्रभावितों को सरकार आपदा एवं राहत मैन्युअल के तहत राहत राशि देती है। पर्वतीय क्षेत्रों में आवास क्षतिग्रस्त होने पर 1,01,900 रुपये, मैदानी क्षेत्रों में 95,000 रुपये की मदद दी जाती है। जोशीमठ की आपदा में लोगों को भारी नुकसान हो रहा है। इसके लिए सरकार को अलग से प्रभावितों के पुनर्वास के लिए नीति बना सकती है।