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जोड़ासांको सीट: टैगोर की जन्मस्थली से इस बार किसे मिलेगी जीत, बंगाल का गौरवशाली इतिहास समेटे है क्षेत्र

Sun, 04 Apr 2021 07:54 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • तृणमूल कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद विवेक गुप्ता और भाजपा की मीना पुरोहित के बीच जोड़ासांको सीट पर कड़ी टक्कर   
  • इसी विधानसभा क्षेत्र में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जन्मस्थली ठाकुरबाड़ी,  यहीं है बड़ा बाजार
  • अब तक मारवाड़ी उम्मीदवारों के ही हाथ लगी है बाजी 
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रवींद्रनाथ टैगोर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कहने को तो जोड़ासांको पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से केवल एक विधानसभा सीट है, लेकिन इस सीट का अपने-आप में महत्व इतना ज्यादा है कि यह अकेले ही पूरे बंगाल का सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व करती है। इसी विधानसभा क्षेत्र में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जन्मस्थली ठाकुरबाड़ी आती है। 

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यह विधानसभा सीट बंगाल के साहित्य-कला साधना और शिक्षा के केंद्र के रूप में देश-दुनिया में विख्यात है। यहीं कोलकाता का बड़ा बाजार एरिया भी आता है, जो पश्चिम बंगाल के व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है। बंगाली भाषाभाषियों के बीच यह सीट राजस्थान के हिंदीभाषी मारवाड़ियों की बहुलता वाली सीट है। मारवाड़ी लोग ही अब तक यह तय करते आए हैं कि इस सीट पर बाजी किसके हाथ लगेगी।

इस बार तृणमूल और भाजपा में टक्कर
आजादी के समय से एक-दो मौकों को छोड़कर यहां कांग्रेस का कब्जा रहा, लेकिन ममता बनर्जी के आने के बाद तृणमूल कांग्रेस का कब्जा बना हुआ है। विवेक गुप्ता इस सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। वे टीएमसी के राज्यसभा सांसद भी रहे हैं और पहली बार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 
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डिप्टी मेयर रही हैं मीना पुरोहित
गुप्ता की मारवाड़ी समुदाय पर भी पकड़ है, जो उनकी ताकत मानी जाती है। उनका मुकाबला भाजपा की मीना पुरोहित से है। मीना चार बार पार्षद और डिप्टी मेयर भी रही हैं।

राहुल सिन्हा दो बार पराजित हुए

भाजपा इस सीट पर अब तक कमजोर ही रही है। पश्चिम बंगाल भाजपा के दिग्गज नेता राहुल सिन्हा यहां से लोकसभा और विधानसभा दोनों ही चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन दोनों ही बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। उनके जैसे बड़े चेहरे की बजाय भाजपा ने इस बार मीना पुरोहित को अपना उमीदवार बनाया है। ऐसे में उन्हें यहां कितना समर्थन हासिल हो पाता है, यह देखने वाली बात होगी।  

कैसा है जोड़ासांको का चरित्र
जोड़ासांको पर गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की गहरी छाप पड़ी। यह पूरी तरह शहरी आबादी वाला क्षेत्र है और यहां का कोई भी इलाका ग्रामीण नहीं है। इसकी ग्यारह नगर निगम की सीटों में से आठ पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। 

यह है अंक गणित
  • लोकसभा, विधानसभा से लेकर नगर निगमों तक में तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। 
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की जनसंख्या 2,34,845 है। 
  • 2019 लोकसभा चुनाव के अनुसार यहां कुल मतदाता 1,91,912 हैं। 
  • 79 प्रतिशत हिंदू और 21 प्रतिशत मुसलमान हैं। 
  • 03 फीसदी अनुसूचित जाति के लोग हैं। 
  • 59 प्रतिशत पुरूष और 41 प्रतिशत महिलाएं हैं। 
  • 81 फीसदी पुरूष और 84 फीसदी महिलाएं शिक्षित हैं। 
  • मारवाड़, बिहार, उत्तरप्रदेश के हिंदी भाषियों का इलाका है।

जोड़ासांको का बांग्ला भाषा में यह है अर्थ

बांग्ला भाषा में जोड़ासांको का अर्थ है लकड़ी या बांस का पुल जो दो क्षेत्रों को आपस में जोड़ने का काम करता है, लेकिन उत्तरी कोलकाता लोकसभा की इस एक विधानसभा सीट ने पूरे बंगाल को अपने साथ जोड़ने का काम किया है। 

यह सीट उत्तर कोलकाता में रबिंद्रा सारिणी रोड़ पर स्थित है जो पहले चित्तपुर रोड के नाम से जानी जाती थी। इसे कोलकाता के जमींदार सबर्ण राय चौधरी ने बनवाया था। पुराने जमाने में ये मुर्शिदाबाद और कालीघाट को जोड़ता था। आजकल इसके पश्चिम में कलाकार स्ट्रीट, दक्षिण में एमजी रोड़, पूर्व में चितरंजन एवेन्यू और उत्तर में काली कृष्णा टैगोर स्ट्रीट–विवेकानंद रोड़ है। रविंद्र सारिणी जोड़ासांको के बीचो-बीच उत्तर से दक्षिण की तरफ जाती है।

बड़ा बाजार में होता है रोज करोड़ों का व्यापार
कोलकाता का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र बड़ा बाजार इसी इलाके में पड़ता है। यहां एक दिन में करोड़ों का व्यापार होता है। बड़ा बाजार ट्रेडिंग का मुख्य केंद्र है। राजस्थान से आने वाले सभी मारवाड़ी कोलकाता के बड़ा बाजार से ही अपने व्यापार की शुरूआत करते हैं। चाहे वो जालान हों या पोद्दार, मारवाड़ी समुदाय का बड़ा बाजार से विशेष नाता है। बड़ा बाजार रेलवे स्टेशन व्यापारिक गतिविधयों का केंद्र है कोलकाता सर्कुलर रेलवे स्टेशन भी जोड़ासांकों में ही है। स्यालदा रेलवे स्टेशन भी यहीं पर है।

कब किसे मिली जीत
जोड़ासांको सीट कांग्रेस का गढ़ रही है और मारवाड़ी विधायकों ने ही लंबे समय तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है। अपवाद के रूप में 1952 में फॉर्वर्ड ब्लॉक लेफ्ट के अमरेंद्रनाथ बसु ने कांग्रेस के भगवती प्रसाद खेतान को भारी बहुमत से हराया था। इसके बाद पूरे बीस साल कांग्रेस यहां बेताज बादशाह रही 1957 से 1977 तक कांग्रेस के मारवाड़ी उम्मीदवार भारी मतों से विजयी होते रहे।

आपातकाल का असर पड़ा, जनता दल के शास्त्री जीते थे

देश की तरह बंगाल पर भी आपातकाल का असर पड़ा। जोड़ासांको सीट पर भी इसका असर हुआ और जनता दल के विष्णु कांत शास्त्री ने कांग्रेस के दिग्गज नेता और विजय की हैट्रिक बनाने वाले देवकी नंदन पोद्दार को भारी बहुत से हरा दिया। हालांकि, 1982 में हुए चुनावों में कांग्रेस के दिग्गज नेता देवकी नंदन पौद्दार फिर से चुनाव जीते। इतना ही नहीं वे 1982 से 1996 तक लगातार चुनाव जीतते रहे।

कांग्रेस के बाद तृणमूल ने जमाया कब्जा  
ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के लिए नई बयार लेकर आईं। उन्होंने पुराने समीकरणों को ध्वस्त करते हुए इस प्रतिष्ठित सीट पर 2001 में कब्जा जमाया जो आज तक बरकरार है। 2001 और 2006 में मुख्य मुकाबला दो मारवाड़ियों तृणमूल कांगेस के सत्य नारायण बजाज और ऑल इंडिया फॉर्वर्ड ब्लॉक के श्याम गुप्ता के बीच रहा। दोनों बार सत्यनारायण बजाज विजयी रहे। दरअसल, 1957 से लेकर 2006 तक इस सीट पर मारवाड़ी प्रत्याशी ही विजयी होते रहे।

1957 में कांग्रेस के आनंदीलाल पोद्दार, 1962 में कांग्रेस के बद्री प्रसाद पोद्दार, 1967 में कांग्रेस के आर के पोद्दार, 1969, 1971 और 1972 में कांग्रेस के देवकीनंदन पोद्दार विजयी रहे। 1977 में आपातकाल के बाद हुए विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के विष्णुकांत शास्त्री चुनाव जीते। 20 साल बाद कोई गैर मारवाड़ी, लेकिन हिंदी भाषी ही विजयी रहा।
 
लेकिन अगले चुनाव में 1982 में कांग्रेस के मारवाड़ी उम्मीदवार देवकी नंदन पोद्दार फॉर्वर्ड ब्लॉक के मारवाड़ी उम्मीदवार श्याम सुंदर गुप्ता को हरा कर चुनाव जीत गए। देवकीनंदन पोद्दार ने मारवाडी बहुल जोड़ासांको सीट पर लंबी पारी खेली। वे 1987, 1991, 1996 में लगातार चुनाव जीते। इस सीट के चुनावी इतिहास में देवकीनंदन पोद्दार सबसे लोकप्रिय नेता रहे।

21 वीं सदी की शुरूआत में 2001 में तृणमूल ने जब पहली बार अपना उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारा तो मारवाड़ी बहुल इलाका देखते हुए मारवाड़ी सत्यनारायण बजाज को और 2006 में दिनेश बजाज को अपना उम्मीदवार बनाया। दोनों बार तृणमूल उम्मीदवार चुनाव जीते। हालांकि फॉर्वर्ड ब्लॉक ने भी मारवाड़ी श्यामसुंदर गुप्त को अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन वे चुनाव नहीं जीत पाए।

शमिता बख्शी दो बार जीतीं
बंगाली मूल की उम्मीदवार ने 1957 के बाद 2011 में यहां से विजय हासिल की। शमिता बक्शी यहां से तृणमूल के टिकट पर 2011 और 2016 में लगातार दो बार चुनाव जीतीं। 10 दस साल के बाद फिर से तृणमूल कांग्रेस ने मारवाड़ी विवेक गुप्त को अपना उम्मीदवार बनाया है।
 
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टैगोर ही नहीं कई हस्तियों की जन्मस्थली

यह सीट बंगाल तो क्या पूरे देश का गौरव कही जा सकती है। ठाकुरबाड़ी के नाम से जानी जाती है। गुरुदेव रवींद्रनाथ नाथ टैगोर का जन्म यहीं हुआ और यहीं उनका पैतृक निवास है। उनके दादा और पिता का जन्म भी यहीं हुआ था, इसलिए यह इलाका ठाकुरबाड़ी के नाम से प्रसिद्ध है। बंगाल के सुप्रसिद्ध साहित्यकार काली प्रसन्न सिन्हा, कृष्णदास पाल, दीवान बनारसी घोष गोकुल चंद्र दा, प्रफुल्ल चंद्र गेन, नरसिंह चंद्र दा और चंद्र मोहन चटर्जी की जन्मस्थली भी यहीं है।
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