फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिखों से जुड़े चुटकुलों पर रोक लगाने के लिए कमेटियां गठित

Wed, 13 Jul 2016 01:57 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
सिख समुदाय पर बनने वाले चुटकुलों पर रोक लगाने के मद्देनजर सिखों के विभिन्न संगठनों ने सेवानिवृत्त जजों की समितियां बनाई हैं। ये समितियां सुझाव पेश करेंगी कि किस प्रकार इस तरह के इन चुटकुलों को रोका जा सकता है।
विज्ञापन


दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी(डीएसजीएमसी) की ओर से गठित कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एमवाई इकबाल और एचएस बेदी सदस्य हैं। वहीं शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भी इसे लेकर एक समिति का गठन किया है। इस समिति में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज केएस ग्रेवाल सदस्य है।

डीएसजीएमसी एवं एसजीपीसी ने यह जानकारी मंगलवार को चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को दी। डीएसजीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आरएस सूरी ने पीठ को बताया कि समिति इसे लेकर बैठक कर रही है। समिति इसका उपाय बताएगी कि आखिर सिखों पर बनने वाले चुटकुलों को कैसे रोका जाए। साथ ही समिति उपाय निकालने की कोशिश करेगी कि आखिरकार इंटरनेट पर होने वाले चुटकुलों के प्रचार-प्रसार पर कैसे रोक लगाई जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

कमेटियां पेश करेंगी सुझाव, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज भी कमेटियों में शामिल

सूरी ने बताया कि समिति में पूर्व विधि सचिव रघुबीर सिंह और शिक्षाविद वेद बरूआ भी सदस्य है। वहीं एसजीपीसी की ओर से पेश वकील ने बताया कि समिति की बैठक चंडीगढ़ में हुई है। उन्होंने बताया कि समिति में पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव रमेश चंद्र सिंह, श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति गुरमोहन सिंह वालिया भी सदस्य हैं।

डीएसजीएमसी एवं एसजीपीसी ने पीठ से गुहार की जब तक उनके द्वारा कमेटी की सिफारिशें नहीं आ जाती तब तक के लिए सुनवाई टाल दी जाए। जिसके बाद पीठ ने सुनवाई छह हफ्ते के लिए टाल दी। मालूम हो कि सिख पर बनाने वाले चुटकुलों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर महिला वकील हरविन्दर चौधरी ने याचिका दाखिल की थी।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने एसजीपीसी, डीएसजीपीसी आदि को भी पक्षकार बनाते हुए सभी को अपना-अपना सुझाव देने के लिए कहा था। अदालत ने पक्षकारों को यह बताने के लिए कहा कि इस संबंध में अदालत क्या निर्देश जारी कर सकती है। इन सभी को उपाय सुझाने के लिए कहा गया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें