निजी डाटा सुरक्षा बिल पर गठित संयुक्त संसदीय समिति ने बृहस्पतिवार को विज्ञापन और कंटेंट दोनों में संलग्न होने के चलते गूगल की तटस्थता पर सवाल उठाए। साथ ही पूछा कि क्या उसका लोगों के विकल्पों पर ‘नियंत्रण’ करना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं है।
भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता वाली समिति के समक्ष गूगल के निदेशक और भारत में कानूनी प्रमुख गीतांजली दुग्गल, सरकारी मामले और पब्लिक पॉलिसी के प्रमुख अमन जैन, पब्लिक पॉलिसी और सरकारी संबंधों के प्रबंधक राहुल जैन पेश हुए और सवालों के जवाब दिए। बैठक के बाद लेखी ने बताया कि वे खुद प्लेटफार्म्स, विक्रेता और न्यूज एजेंसी हैं।
साथ ही वह खुद इसका नियंत्रण करते हैं कि कौन सी सूचना पहले आएगी, कौन सी बाद में आए या कौन सी खबर फ्लैश होगी और कौन सी दबा दी जाएगी। ऐसे में वह कैसे तटस्थ प्लेटफार्म रह सकता है?
समिति के सदस्यों कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा, भाजपा सांसद राजीव चंद्रशेखर और बीजद सांसद भर्तृहरि महताब, अमर पटनाइक ने भी गूगल के प्रतिनिधियों से सवाल किए। गूगल के अलावा फेसबुक, ट्विटर, अमेजन के प्रतिनिधि भी समिति के सामने पेश हुए।
साथ ही रिलायंस जियो, एयरटेल, ओला और उबर के प्रतिनिधियों को भी पेश होने को कहा गया है। समिति निजी डाटा संरक्षण विधेयक 2019 की समीक्षा कर रही है।