अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच किसी भी तरह की डील करीब होती नजर नहीं आ रही है। बोल्टन के मुताबिक, मौजूदा हालात में यह मानना मुश्किल है कि कोई समझौता जल्द हो सकता है।
बोल्टन ने ट्रंप की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने बातचीत के लिए तुर्की और पाकिस्तान जैसे देशों के जरिए संपर्क साधने की कोशिश की है, लेकिन ईरान ने साफ इनकार कर दिया है। ईरान का मानना है कि यह संघर्ष उसके अस्तित्व से जुड़ा है, इसलिए वह किसी भी तरह का समझौता आसानी से नहीं करेगा।
क्या ट्रंप की रणनीति साफ है या उलझी हुई?
बोल्टन के अनुसार, ट्रंप की नीति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रंप अक्सर तात्कालिक फैसले लेते हैं और लंबी रणनीति पर कम ध्यान देते हैं। बाजार में गिरावट और आर्थिक दबाव को देखते हुए ट्रंप ने हमलों को टालने का फैसला लिया हो सकता है, ताकि बातचीत की संभावना बनी रहे और समय मिल सके।
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क्या वास्तव में कोई बातचीत चल रही है?
पूर्व सलाहकार का कहना है कि कुछ संदेश और संपर्क जरूर हुए हैं, लेकिन इसे औपचारिक बातचीत नहीं कहा जा सकता। ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि कोई बातचीत नहीं हो रही है। इससे यह साफ होता है कि दोनों देशों के दावों में बड़ा अंतर है और जमीनी स्तर पर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना अहम मुद्दा?
बोल्टन ने कहा कि इस पूरे विवाद में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे अहम मुद्दा बन गया है। उनका मानना है कि अगर इसे खोला जाता है तो यह किसी भी संभावित समझौते का संकेत हो सकता है। वहीं, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अमेरिका को इस क्षेत्र में कड़ा रुख अपनाना चाहिए।
भारत और तेल आपूर्ति पर क्या बोले बोल्टन?
पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई बातचीत का जिक्र करते हुए बोल्टन ने कहा कि भारत के लिए ईरान से तेल खरीदना अहम मुद्दा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इससे ईरान को आर्थिक ताकत मिलती है, जिससे उसका सैन्य तंत्र मजबूत होता है। इसलिए अमेरिका वैकल्पिक तेल स्रोतों पर जोर दे सकता है। बोल्टन के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों में स्थिति साफ हो सकती है कि बातचीत कितनी गंभीर है। फिलहाल हालात ऐसे हैं जहां न तो युद्ध पूरी तरह रुका है और न ही शांति की कोई ठोस दिशा दिख रही है। इससे पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और दुनिया की नजर इस पर टिकी है।
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