फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेएनयू के शिक्षकों ने कुलपति के खिलाफ खोला मोर्चा, नियमों को ताक पर रखकर काम करने का आरोप

Mon, 01 Mar 2021 10:55 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार - फोटो : facebook.com/mamidalajagadesh.kumar
विज्ञापन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने सोमवार को कुलपति एम जगदीश कुमार को हटाने की मांग की। जेएनयू के शिक्षकों का कहना है कि 26 जनवरी को कुलपति का कार्यकाल खत्म हो गया है। वे विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति है। इसके बाद भी वे सेंटर में चेयरपर्सन को नियुक्त कर रहे हैं, जो कि नियमों के विरुद्ध है। वहीं वे लगातार नियमों को ताक पर रखकर विश्वविद्यालयों के फंड का दुरुपयोग कर रहे हैं।

विज्ञापन


एक संवाददाता सम्मेलन में जेएनयू के शिक्षक संघ की सचिव मौसमी बसु ने कुलपति पर आरोप लगाते हुए कहा, कुलपति जगदीश कुमार विश्वविद्यालय में लगातार वित्तीय अनियमित्ताएं कर रहे हैं। इसकी शिकायत हमने सभी संबंधित जगह की लेकिन कहीं कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। हाल ही में एक ऑनलाइन मूर्ति अनावरण कार्यक्रम हुआ था। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे। इस प्रोग्राम में कुलपति ने नौ लाख रुपए खर्च किए। 

बसु ने कहा कि उससे एक सप्ताह पहले हुए एक ऑनलाइन प्रोग्राम में जिसमें राष्ट्रपति भी शामिल हुए थे, उसमें मात्र एक से डेढ़ लाख रुपए ही खर्च किए गए। आज हम कुलपति से पूछना चाहते है कि एक सप्ताह में ऐसा क्या हुआ कि एक ऑनलाइन कार्यक्रम में इतना कम खर्चा हुआ और दूसरे कार्यक्रम में नौ लाख रुपए लग गए। जेएनयू प्रोफेसर विक्रमादित्य चौधरी ने अमर उजाला से कहा, आज जेएनयू की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब हैं। 
विज्ञापन


चौधरी ने कहा कि जेएनयू में आज शिक्षकों और बच्चों के लिए कॉन्फ्रेंस और सेमिनार में जाने के लिए पैसे नहीं है। विश्विविद्यालय के पास एग्जामिनर बुलाने तक के पैसे नहीं है। शिक्षकों को वेतन देने के लिए पैसे नहीं है। फरवरी महीने का वेतन अभी आज तक सभी शिक्षकों नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि कुलपति को हटाया जाए। नियमित कुलपति की नियुक्ति की जाए, ताकि विश्वविद्यालय की व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।

जेएनयू के प्रोफेसर डीके लोबियाल ने अमर उजाला को बताया कि कुलपति सिक्योरिटी, सर्विलांस और स्टैच्यू पर विश्वविद्यालय का पैसा खर्च कर रहे हैं। कोर्ट में केस लड़ने के लिए लाखों रुपए खर्च हो रहे है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जो परीक्षा करवा रहा है इसमें विश्वविद्यालय के 10 से 12 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। जबकि साढ़े तीन करोड़ रुपयों में जेएनयू ये परीक्षाएं करवाता रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी विश्वविद्यालय में एससी, एसटी और ओबीसी पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है। कुलपति नियमों के विपरीत उच्च पदों पर अपनी पंसद के लोगों को नियुक्त कर रहे हैं। इससे एकेडेमिक काउंसिल के निर्णय प्रभावित हो रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें