Left's Protest on JNU Violence
- फोटो : AmarUjala
22 अप्रैल, 1969 को इस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। विश्वविद्यालय का नाम भले ही देश के पहले प्रधानमंत्री व कांग्रेस नेता जवाहर लाल नेहरू के नाम पर है, लेकिन सच यह भी है कि करीब 50 साल के इतिहास में यहां वामपंथ का ही वर्चस्व रहा है।
जेएनयू छात्र संघ चुनावों की बात करें तो 1974 से 2008 और 2012 से अब तक सिर्फ एक बार ही भाजपा समर्थित छात्र संघ एबीवीपी को जीत मिली है। जबकि करीब 23 बार आइसा (आल इंडिया स्टुडेंड एसोसिएशन) और 12 बार एसएफआई (स्टुडेंट फेडरेशन आफ इंडिया) का ही राज रहा है।
विचारधाराओं का टकराव
- जेएनयू में वामपंथी और अन्य विचाराधाराओं का टकराव भी विवाद का प्रमुख कारण माना जा सकता है।
- यहां छात्र साफ तौर पर लेफ्ट विंग और राइट विंग के रूप में दो धड़ों में बंटे रहते हैं
- विशेषज्ञों की मानें तो देश में वामपंथ का आधार लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे में जेएनयू की छोटी से छोटी घटना बड़ा रूप ले लेती है।
- देश में सिर्फ अब केरल में ही वाम सरकार है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के आने के बाद से उनका आधार कम होता जा रहा है।
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ये भी हो सकते हैं कारण
छात्रों ने निकाली पदयात्रा।
- फोटो : अमर उजाला।