जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ ने हाईकोर्ट की रोक के बावजूद अनिवार्य हाजिरी का विरोध करते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन के दो अधिकारियों को बंधक बना लिया। कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार ने इसकी पुष्टि की है। दवा और खाना नहीं मिलने पर दोनों की तबीयत बिगड़ गई है।
लंच, डिनर और दवा न मिलने से दोनों अधिकारियों की तबीयत बिगड़ी
प्रो. चिंतामणि महापात्र जब दोपहर को कक्षा में जाने के लिए निकले तो छात्रों ने उन्हें दौड़ाकर कुलपति कार्यालय के अंदर बंद कर दिया। प्रबंधन ने छात्रों को लिखित संदेश भी भेजा कि अधिकारियों के पास उनकी दवा नहीं है। वहीं, लंच व डिनर के साथ दवा न मिलने के चलते उनकी तबीयत खराब हो गई है।
अनिवार्य हाजिरी का विरोध जता रहे हैं छात्र
जेएनयू कैंपस में बृहस्पतिवार को दिन से देर रात तक हंगामा चलता रहा। वामपंथी संगठनों से जुड़े छात्र और शिक्षकों ने अनिवार्य हाजिरी के विरोध में विश्वविद्यालय बंद की कॉल दी थी। छात्रों ने वीडियो वायरल करते हुए पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया।
सड़क पर परीक्षा देकर जताया विरोध
जेएनयू में इन दिनों कुछ परीक्षाएं चल रही हैं। अनिवार्य उपस्थिति के विरोध स्वरूप छात्र कक्षाओं से बाहर परीक्षा दे रहे हैं। इस दौरान चाइनीज भाषा केंद्र के विद्यार्थियों ने जमीन पर बैठकर परीक्षा दी। इस दौरान शिक्षकों ने भी उनका साथ दिया।
जेएनयू के रजिस्ट्रार, प्रमोद कुमार ने बताया कि छात्रों के आरोप व वायरल वीडियो में पुलिस की कहानी बिल्कुल गलत है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पुलिस को नहीं बुलाया था। सैकड़ों की तादाद में छात्र कुलपति कार्यालय में आते हैं तो ऐसे उनकी बात सुनना मुश्किल है। छात्रसंघ का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांग लेकर आएं तो उससे बात करेंगे।
पुलिसकर्मी सीसीटीवी देखने पहुंचा था
वसंत कुंज पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने पुलिस नहीं बुलायी थी और न ही हम वहां गए थे। छात्रों ने जिस पुलिस कर्मी की फोटो को वायरल किया है, असल में वह वसंत विहार थाने में तैनात है और जेएनयू से बाहर कसी घटना की जांच के सिलसिले में जेएनयू गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच करने गया था।