कमेटी ने हिंसा की स्वतंत्र न्यायिक जांच की भी सिफारिश की है। कमेटी ने कहा, छात्रों और शिक्षकों के कॉल करने के बाद भी पुलिस ने तुरंत कार्रवाई नहीं की। इस पर दिल्ली पुलिस कमिश्नर व अन्य पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। साथ ही जेएनयू हॉस्टल की फीस बढ़ाने के फैसले को भी वापस लेना चाहिए।
हिंसा में एबीवीपी के कार्यकर्ता शामिल
सुष्मिता देव ने कहा, इस बात के पर्याप्त सुबूत हैं कि साबरमती हॉस्टल और साबरमती टी प्वाइंट पर छात्रों और शिक्षकों पर हुए हमलों में एबीवीपी के कार्यकर्ता का हाथ है। हॉस्टल में घुसे हमलावरों ने विशेष धर्म के लोगों को निशाना बनाया और उन्हें छोड़ दिया, जो एबीवीपी से जुड़े थे। इसमें कोई शक नहीं कि हिंसा पूर्व नियोजित और आपराधिक षड्यंत्र था।
जांच पर भी सवाल
कमेटी ने मामले की जांच पर भी कई सवाल उठाए हैं। कमेटी के मुताबिक, छात्रों और शिक्षकों को सिर में गंभीर चोटें लगने के बावजूद पुलिस ने हत्या के प्रयास का केस तक दर्ज नहीं किया। वहीं, हॉस्टल में हमले के 40 घंटे बाद फोरेंसिक टीम पहुंची।