इसके अलावा उत्तर प्रदेश कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी जावीद अहमद का भी नाम चल रहा है। वह वर्तमान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्राइमोलॉजी एंड फोरेसिंक साइंसेज के प्रमुख हैं। वह सीबीआई में 13 साल तक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 1994 से 2002 के दौरान वह एसपी से डीआईजी तक पहुंचे और 2009-14 तक संयुक्त निदेशक रहे।
उन्हें सीबीआई में एडिशनल डायरेक्टर के पद पर पदोन्नत इसलिए नहीं किया गया क्योंकि तत्कालीन गृह सचिव अनिल गोस्वामी ने आईपीएस अधिकारियों के 1984 बैच की पैनल फाइल को मंजूरी नहीं दी थी। अहमद यूपी में डीजीपी के पद पर भी तैनात रहे हैं। उन्होंने यूपी 100, महिलाओं के लिए विशेष हेल्पलाइन और पुलिस की ट्विटर पर मौजूदगी जैसे कदम उठाए थे।
इन नामों की भी चर्चा
राजस्थान के पूर्व डीजीपी ओपी गल्होत्रा भी 11 साल तक सीबीआई में रह चुके हैं। वह 1996 से 2002 तक एसपी और 2008 से 15 तक संयुक्त निदेशक रहे थे। इसके अलावा गल्होत्रा के बैच में साथी रहे और यूपी कैडर के एचसी अवस्थी भी दौड़ में शामिल हैं। इसके अलावा असम-मेघालय कैडर के वाईसी मोदी, सीआईएसएफ के डायरेक्टर जनरल राजेश रंजन, आईटीबीपी के डीजी एसएस देशवाल, यूपी कैडर के 1985 बैच के अरुण कुमार, केरल कैडर के लोकनाथ बेहेरा, ऋषि राज सिंह, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनाइक के नाम भी छांटे गए हैं।
आलोक वर्मा को हटाने से खाली है पद
सीबीआई प्रमुख का पद आलोक वर्मा को पद से हटाए जाने के बाद से खाली है। विवादों के चलते 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी को 10 जनवरी को सीबीआई से हटाकर दूसरे विभाग में भेजा गया था।