झारखंड के गिरिडीह जिले के एक 38 वर्षीय प्रवासी मजदूर की मौत हो गई। उसका अंतिम संस्कार उत्तर प्रदेश में किया गया। अब उनकी पत्नी ने सरकार से मुआवजे की गुहार लगाई है। 35 वर्षीय सुमति देवी ने राज्य सरकार से अपनी उत्तर प्रदेश की यात्रा की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है। वह मुआवजा पाने के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए उत्तर प्रदेश जाने में असमर्थ हैं।
5 अगस्त को आगरा में ट्रेन में बेहोशी की हालत में पाए गए
रांची स्थित राज्य प्रवासी मजदूर नियंत्रण कक्ष के एक अधिकारी के अनुसार, उनके पति सीताराम यादव एक हफ्ते पहले ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। जीआरपी ने उन्हें 5 अगस्त को आगरा में ट्रेन में बेहोशी की हालत में पाया। अधिकारी ने बताया कि जीआरपी उन्हें अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
शुरुआत में परिवार तस्वीरों से शव को नहीं पहचान पाया
अधिकारी ने कहा, 'सीताराम के पास मिले दस्तावेजों के आधार पर आगरा पुलिस ने गिरिडीह में परिवार से संपर्क किया। शुरुआत में परिवार तस्वीरों से शव को नहीं पहचान पाया। बाद में उन्होंने मृतक के हाथ पर बने टैटू से उसकी पहचान की।' हालांकि, वे उत्तर प्रदेश को यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं भेज पाए कि मृतक उनके परिवार का सदस्य था। इसलिए पुलिस ने शव को अज्ञात घोषित कर दिया और आगरा में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
'हमारे पास आगरा जाने के लिए पैसे नहीं थे'
मृतक की पत्नी ने बताया कि उनके पति एक महीने पहले गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड के अदुआडीह गांव स्थित घर से राजस्थान में रोजी-रोटी की तलाश में निकले थे। सुमति देवी ने बताया, 'शुरू में हम शव को पहचान नहीं पाए, क्योंकि हमें पता था कि वह राजस्थान गए थे। वह आगरा में कैसे हो सकते हैं? फोटोज में जब हमने उनके हाथ पर उनके नाम का टैटू देखा, तो हमने उन्हें पहचान लिया। तब तक उनके शव का अंतिम संस्कार हो चुका था। हम एक बहुत ही गरीब परिवार से हैं। हमारे पास आगरा जाने के लिए पैसे नहीं थे।'
'सरकारी मुआवजा दिलाने में मदद करें'
उन्होंने बताया कि शव के न होने पर उनके पति का पुतला बनाकर अंतिम संस्कार किया गया, जिसे बाद में आग के हवाले कर दिया गया। दो बेटियों सहित तीन बच्चों की मां ने बताया कि सीताराम परिवार के इकलौते कमाने वाले शख्स थे। उन्होंने आगे कहा, 'मुझे नहीं पता कि कैसे गुजारा करूंगी। मैं सरकार से आग्रह करती हूं कि हमें सरकारी मुआवजा दिलाने में मदद करें।'
'सरकार ही एकमात्र उम्मीद'
नियंत्रण कक्ष के अधिकारी ने कहा, 'अपंजीकृत प्रवासी मजदूरों के लिए शव लाने के लिए 50,000 रुपये सहित 1.5 लाख रुपये के मुआवाजे का प्रावधान है। चूंकि उनके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया था, इसलिए परिवार 1 लाख रुपये का दावा कर सकता है। इसके लिए परिवार को आगरा में एक प्राथमिकी दर्ज करानी होगी और वैध दस्तावेज दिखाने होंगे।' सुमति देवी ने कहा कि इस संकट में परिवार के लिए सरकार ही एकमात्र उम्मीद है।