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Supreme Court: सोरेन सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी, शेल कंपनी और लीज आवंटन का मामला

Sat, 11 Jun 2022 05:23 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली /रांची

सार

हाईकोर्ट की बेंच ने कहा, "यह अदालत तैयार किए गए मुद्दे का जवाब देने के बाद और यहां ऊपर की गई चर्चाओं के आधार पर अपने विचार को सारांशित कर रही है और यह माना जाता है कि रिट याचिकाओं को रखरखाव के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है।" 
 
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supreme court - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। दरअसल हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ खनन पट्टे के अनुदान में कथित अनियमितता और उनके परिजनों व सहयोगियों के द्वारा शेल कंपनियों में कथित निवेश के मामले की जांच की मांग के लिए याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने इस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार भी कर लिया था। 
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झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार 3 जून को कहा था कि उसकी सुविचारित राय है कि रिट याचिकाओं को रखरखाव के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है और मेरिट के आधार पर मामलों की सुनवाई के लिए आगे बढ़ा जाएगा।   

हाईकोर्ट की बेंच ने कहा, "यह अदालत तैयार किए गए मुद्दे का जवाब देने के बाद और यहां ऊपर की गई चर्चाओं के आधार पर अपने विचार को सारांशित कर रही है और यह माना जाता है कि रिट याचिकाओं को रखरखाव के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है।" 
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इससे पहले 24 मई को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को मामले में जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर शुरुआती आपत्तियों पर पहले सुनवाई करने के लिए कहा था। 

सुप्रीम कोर्ट ने देखा था कि हाईकोर्ट ने 13 मई के अपने आदेश में कहा था कि वह शिव शंकर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई से पहले निपटेगा और फिर याचिका में लगाए गए आरोपों की मेरिट में जाएगा।

बसंत सोरेन के मामले में 15 जून को सुनवाई

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे बाई व दुमका से निर्वाचित विधायक बसंत सोरेन को खनन पट्टा लीज पर दिए जाने के मामले में 15 जून को भारत निर्वाचन आयोग में सुनवाई होगी। आयोग ने उन्हें मामले में संशोधित लिखित जवाब दाखिल करने के लिए 10 जून तक का समय दिया था। 

बसंत सोरेन के खिलाफ भाजपा ने पद का दुरुपयोग करने की शिकायत करते हुए राज्यपाल रमेश बैस को ज्ञापन सौंपा था। इसके साथ ही उन्हें अयोग्य करार देने की मांग की थी। राज्यपाल ने उक्त ज्ञापन को आवश्यक कार्रवाई के लिए भारत निर्वाचन आयोग को भेज दिया था। 
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