दूसरी ओर डॉ. तिर्की ने कहा कि वह ऑफिस पॉलिटिक्स का शिकार थे। साथ ही उन्होंने कहा है कि मेरी पत्नी और बहन एक इम्यूनोसप्रेसिव (प्रतिरक्षा को दबाने वाली) अवस्था में हैं और उनमें संक्रमण फैलने का ज्यादा खतरा है।
इसलिए हमने अपने पदों से इस्तीफा दिया है। मेरी बहन का हाल ही में गुर्दे का प्रत्यारोपण हुआ था। उन्होंने कहा है कि वैसे भी मैं भागने वाला नहीं हूं और फिलहाल अपनी सेवाएं दूंगा, लेकिन कोविड -19 संकट के खत्म होने बाद वो इस नौकरी को छोड़ देंगे।
डॉ तिर्की ने कहा कि चाईबासा के लोग जानते हैं कि उन्होंने शहर में अपने आखिरी कार्यकाल के दौरान कैसे उनकी सेवा की है। मैं गैर-संचारी रोग विभाग में चार दिन पहले यहां फिर से आया था, लेकिन अगले दिन ही मुझे कोरोना आइसोलेशन वार्ड में अकेले तैनात किया गया था। डॉ. तिर्की ने आरोप लगाया कि अन्य डॉक्टरों को आइसोलेशन वार्ड में तैनात नहीं किया गया था और मैं अकेले मरीजों की भीड़ को कैसे संभाल सकता था।
उन्होंने कहा कि मैंने बिना सुरक्षात्मक किट के पहले दिन सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे तक आइसोलेशन वॉर्ड में था। डीएमसीएच की स्थिति यह थी कि यहां अधिकांश दवाएं उपलब्ध नहीं थीं, जिससे आने वाले मरीजों का इलाज किया जा सके।
वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है। अभी तक भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 536 हो गई है। तमिलनाडु में एक व्यक्ति की मौत के साथ देश में कुल मृतकों की संख्या 11 हो गई है।