मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में कोरोना का सबसे पहला मामला जमात से जुड़ी एक महिला का था। आज भी झारखंड की उसी एरिया में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले सामने आए हैं। लेकिन कोरोना के लिए किसी एक धर्म-संप्रदाय को जिम्मेदार ठहराना बेहद गलत है और वे इसकी निंदा करते हैं।
उन्होंने कहा कि जमात का नई दिल्ली का कार्यक्रम मार्च महीने में हुआ था। जबकि कोरोना के मामले पूरी दुनिया में जनवरी में ही सामने आ गए थे। इस जनवरी से मार्च तक विदेश से लाखों लोग भारत आए। ऐसे में कोरोना संक्रमण के लिए केवल जमात को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है।
अमरउजाला डॉट कॉम के इस सवाल पर कि झारखंड अपने प्रवासी मजदूरों के लिए क्या योजना बना रहा है, मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य ने अपने ग्रामीण और शहरी मजदूरों के लिए तीन स्तरीय योजनाएं तैयार की हैं।
इसके माध्यम से बाहर से आने वाले सभी मजदूरों को रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके पहले मजदूरों के आने पर उनको 20 दिन क्वारंटीन में रखा जा रहा है। इन 20 दिनों के लिए उन्हें एकमुश्त राशन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं जिससे इस दौरान उन्हें कोई परेशानी न हो।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि उनका राज्य 95 फीसदी केंद्र के सहयोग पर निर्भर करता है। राज्य के पास आय का कोई साधन नहीं है। वे अपने राज्य के मजदूरों को 200 रुपये प्रति दिन की मजदूरी भी नहीं दे पाते।
जबकि कई राज्य 300 रुपये से अधिक तक देते हैं। ऐसे में केंद्र को उन्हें विशेष सुविधा देनी चाहिए, जिससे वे अपने राज्य की गरीब आदिवासी, पिछड़ी और अल्पसंख्यक बहुल आबादी की बेहतर सेवा कर सकें।
उन्होंने कहा कि मध्यम और लघु उद्योंगों को बेहतर आर्थिक पैकेज देकर इन्हें चलाने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि इसके बिना न तो आर्थिक स्थिति सुधारी जा सकेगी और न ही रोजगार का सृजन किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य के लगभग तीस से चालीस हजार करोड़ रुपए कोल इंडिया और विभिन्न पीएसयू पर बकाया हैं। केंद्र को उनका भुगतान तुरंत कराना चाहिए जिससे वे अपने राज्य का खर्च चला सकें।
साथ ही केंद्र जीएसटी के बकाए की रकम भी राज्यों को तत्काल ,दे जिससे राज्य सरकारें कोरोना से लड़ने की व्यापक रणनीति बनाकर उस पर काम कर सकें।
स्वयं को बिरसा-मुंडा, सिधो-कान्हूं और अंबेडकर के अनुयायी बताने में गर्व करने वाले सोरेन ने कहा कि मजदूरों के घर आने से पहले उनकी तीन स्तरों पर जांच हो रही है। मजदूर जहां से चल रहे हैं, वहां भी उनका टेस्ट हो रहा है।
इसके बाद जब वे स्टेशन पर उतर रहे हैं, वहां भी उनका कोरोना टेस्ट किया जा रहा है। इसके बाद जब वे अपने घर पहुंच रहे हैं, वहां भी उनका टेस्ट हो रहा है। इस प्रकार वे कोरोना संक्रमण को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सबसे तेज टेस्टिंग कराने की कोशिश कर रहा है। अब तक 17 हजार लोगों का कोरोना टेस्ट किया जा चुका है। राज्य में अभी भी कोरोना की स्थिति अन्य राज्यों से बेहतर है।
उन्होंने बताया कि झारखंड में इस समय कोरोना के केवल 127 मरीज सामने आए हैं। इसमें से लगभग एक तिहाई (37 लोगों) का सफल इलाज हो चुका है और वे अपने घरों को वापस जा चुके हैं। कोरोना के कारण राज्य में अभी तक केवल तीन लोगों की मौत हुई है।