राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को रेलवे पुलिस बल (RPF) और रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF) कर्मियों जयपाल सिंह, सुरेंद्र कुमार और कांस्टेबल बुद्ध सैनी को जीवन रक्षा पदक से सम्मानित किया। हेड कांस्टेबल जयपाल सिंह और कांस्टेबल सुरेंद्र कुमार उत्तरी रेलवे में तैनात है। वहीं, कंस्टेबल बुद्ध सैनी रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF) की 7वीं बटालियन में तैनात हैं।
एक बयान में कहा गया है कि 12 मई 2022 को निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन क्षेत्र में बीटीपीएन वैगन में तकनीकी कारणों से आग लग गई थी। उस समय साइट पर करीब एक हजार लोग काम कर रहे थे। भीषण आग लगने से दहशत का माहौल बन गया। जान बचाने के लिए मजदूर हताश होकर इधर-उधर भागने लगे। हेड कांस्टेबल जयपाल सिंह, कांस्टेबल सुरेंद्र कुमार और कांस्टेबल बुद्ध सैनी ड्यूटी पर तैनात थे।
उन्होंने साहस का परिचय देते हुए अपनी जान की परवाह न करते हुए अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ (नेफ्था) से भरे बीटीपीएन वैगन में लगी भीषण आग को फायर यंत्र की मदद से बुझा दिया। अगर समय पर आग को नहीं बुझाया गया होता, तो यह अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ (नेफ्था) से भरे कुल 18 बीटीपीएन वैगनों में फैल जाती, जिससे बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। इससे हजारों लोगों की जान को खतरा हो सकता था। लेकिन जयपाल सिंह, सुरेंद्र कुमार और बुद्धराम सैनी ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब एक हजार मानव जीवन और अरबों रुपये की रेलवे संपत्ति को बचाया है। उनके इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति ने जीवन रक्षा पदक श्रंखला पुरस्कार-2022 के लिए 43 नामों को मंजूरी दी है। इसमें सात सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक, आठ उत्तम जीवन रक्षा पदक और 28 जीवन रक्षा पदक शामिल हैं। चार लोगों को यह पुरस्कार मरणोपरांत प्रदान किया गया है।
किस लिए दिया जाता है यह पुरस्कार
जीवन रक्षा पदक पुरस्कार किसी व्यक्ति की जान बचाने में मानवीय प्रकृति के सराहनीय कार्य के लिए दिया जाता है। जीवन के सभी क्षेत्रों से जुड़े व्यक्ति इन पुरस्कारों के पात्र हैं। ये पुरस्कार मरणोपरांत भी प्रदान किए जाते हैं। इस पुरस्कार के अलंकरण (मेडल, केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र एवं एकमुश्त भत्ता) पुरस्कार प्राप्तकर्ता को उस केंद्रीय मंत्रालय, संगठन या राज्य सरकार द्वारा प्रदान किए जाते हैं, जिससे वह संबंधित है।
भाकपा के राज्यसभा सांसद ने लिखा मुर्मू को खत
इस बीच भाकपा के राज्यसभा सांसद बिनॉय विश्वम ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मुगल गार्डन का नाम बदलकर अमृत उद्यान करने के फैसले के संबंध में एक पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि इतिहास से मुगल शब्द को मिटाने की कोशिश को केवल भारतीय इतिहास को फिर से लिखने और राष्ट्रवाद को फिर से परिभाषित करने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है।
‘उद्यान उत्सव-2023’ का उद्घाटन
‘अमृत उद्यान’ समेत राष्ट्रपति भवन के उद्यानों को आम लोगों के लिए खोलने को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को ‘उद्यान उत्सव-2023’ का उद्घाटन किया था। इससे पहले राष्ट्रपति भवन के ‘मुगल गार्डन’ का नाम बदलकर शनिवार को ‘अमृत उद्यान’ किया गया था। यह उद्यान साल में एक बार जनता के लिए खुलता है और लोग इस बार 31 जनवरी से इस उद्यान को देखने जा सकते हैं। राष्ट्रपति भवन द्वारा रविवार को जारी एक बयान में कहा गया कि अमृत उद्यान 31 जनवरी से 26 मार्च तक पूर्वाह्न 10 बजे से शाम चार बजे तक आगंतुकों के लिए खुला रहेगा। बयान के मुताबिक 28 मार्च से 31 मार्च तक उद्यान विशेष वर्ग के लिए खुला रहेगा। किसानों के लिए 28 मार्च को, दिव्यांग के लिए 29 मार्च को, रक्षा, अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस कर्मियों के लिए 30 मार्च को और आदिवासी महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों सहित महिलाओं के लिए 31 मार्च को उद्यान खुला रहेगा।