इस बीच पार्टी के प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा है कि वे 2019 में एनडीए के साथ मजबूती के साथ खड़े रहेंगे और बिहार में बड़ी जीत दर्ज करेंगे। सीटों के वितरण के सवाल पर अजय आलोक ने कहा कि बिहार के अंदर भाजपा और जदयू के साथ-साथ रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा भी एक सहयोगी हैं। इसलिए सीटों पर तालमेल की बात भी सभी सहयोगियों को साथ लेकर ही तय की जाएगी।
बिहार के अंदर एनडीए गठबंधन को कौन लीड करेगा, इस सवाल पर जदयू प्रवक्ता ने कहा कि बिहार में बीजेपी नेता सुशील मोदी ने स्वयं यह बात मीडिया के सामने कह दिया है कि बिहार में जदयू बड़े भाई की भूमिका निभाएगा। इतने बड़े नेता के इतने स्पष्ट बयान के बाद किसी को इस बात में गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि बिहार में गठबंधन को कौन लीड करेगा।
राजद के द्वारा नीतीश कुमार के लिए महागठबंधन का दरवाजा बंद करने के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अजय आलोक ने कहा कि उन्होंने किसी के पास कोई प्रार्थना पत्र नहीं भेजा है कि उन्हें किसी गठबंधन में शामिल होना है, इसलिए किसी की बयानबाजी का कोई मतलब नहीं है।
गौरतलब है कि जदयू ने चार राज्यों में अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान पर भाजपा को जो तेवर दिखाया था, उससे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस के साथ उसके गठबंधन की संभावनाओं को नि:संदेह ही बल मिला। हालांकि जदयू इस बात को खारिज कर चुका है कि वो फिर से महागठबंधन में शामिल होगा।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को बिहार की 40 सीटों में से 22 मिली थी। दो पर जद(यू) के उम्मीदवार चुनाव जीते थे। यह चुनाव शरद यादव और नीतीश कुमार की जद(यू) ने अकेले दम पर लड़ा था। ठीक ऐसे ही पार्टी ने अब देशभर में अपने जनाधार को बढ़ाने के लिए अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है।