बिहार में महागठबंधन की सरकार भले ही चल रही हो, लेकिन जदयू और राजद के बीच रुक-रुक कर रार शुरू हो जाती है। एक मसले पर दोनों दल एक होते हैं तो दूसरे मसले पर अलग हो जाते हैं। ताजा मामला ईवीएम को लेकर सामने आया है। राजद जहां ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग पर हमलावर है, वहीं जदयू इस मसले पर आयोग के साथ खड़ा है।
राजद नेता मंटू सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग चाह लेगा तो ईवीएम में गड़बड़ी संभव है। राजद नेता ने आरोप लगाया कि 2005 में चुनाव आयोग ने केजे राव के माध्यम से आयोग पर हमला किया। उन्होंने कहा कि राजद की तत्कालीन सरकार को हराने के केजे राव ने लामबंदी की। राजद के इस आरोप को जदयू ने सिरे से खारिज किया है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा है कि आयोग का काम चुनाव कराना होता है, वोट जनता देती है।
आयोग किसी दल को हराने या जिताने का काम नहीं करता है। ईवीएम में और पारदर्शिता लाने की जरूरत अगर है तो लाई जाए, लेकिन इसे खारिज करना ठीक नहीं है।
इधर, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और अब ईवीएम मसले पर भाजपा के साथ जदयू के जाने से जहां कांग्रेस कुछ भी बोलने से बच रही है, वहीं भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार ने तो जदयू को धन्यवाद तक दे दिया। भाजपा की इस दरियादिली पर जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने कहा कि जदयू हमेशा देशहित में समर्थन देता है।
उनके नेता नीतीश कुमार समर्थन देते समय दल नहीं देशहित देखते हैं, लेकिन भाजपा ऐसा नहीं करती है। उसे भी राज्यहित में नीतीश कुमार की नीतियों और बिहार की लंबित मांगों पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए।