1999 में जयरामन जयललिता ने तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार से समर्थन वापस लेकर भारतीय राजनीति को चौंका दिया था। वाजपेयी सरकार से जयललिता के मतभेद तो राजनीतिक थे, लेकिन उनका निर्णय ज्योतिष से प्रभावित था।
समर्थन वापस लेने की घोषणा से पहले जयललिता ने नई दिल्ली के एक होटल में स्वयं को कमरे में बंद कर लिया था। उन्होंने किसी से भी मिलने से इंकार कर दिया क्योंकि अमंगलकारी चंद्रमा अपने आठवें स्थान पर था।
इसके बाद अपने ज्योतिषी से विचार विमर्श के बाद जयललिता ने वाजपेयी सरकार से एआईएडीएमके का समर्थन वापस ले लिया। समर्थन वापसी का पत्र सुबह के 9 बजे के बाद और 10 बजे से पहले सौंपा गया और इसके लिए 14 अप्रैल की तारीख चुनी गई।
इस वाकये से पता चलता है कि जयललिता का ज्योतिष में कितना विश्वास था।
'अम्मा' का ज्योतिष में विश्वास
एक रूढ़िवादी आयंगर परिवार में पैदा हुई जयरामन जयललिता को अंकशास्त्र और ज्योतिष में गहरा विश्वास था। वे ज्योतिषी से सलाह लिए बिना कुछ भी नहीं करती थीं, जो तमिल कैलेंडर पंचंगम के मुताबिक नहीं होता था।
जयललिता तमिल कैलेंडर पंचंगम के मुताबिक ही अपने सारे फैसले लेने के लिए जानी जाती थीं।
अगर उन्हें कोई स्कीम लॉन्च करनी होती थीं, तो तारीख और समय के लिए वह अपने ज्योतिषी से सलाह लेती थीं। नई चीजों को शुरू करने के लिए पंचंगम कैलेंडर के बुधन होराय के मुहुर्त का सहारा लेती थीं।
जयललिता ने एक बार शपथ ग्रहण समारोह को रद्द कर दिया था, क्योंकि उन्हें लगता था कि शपथ ग्रहण का समय अशुभ है।